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सुप्रीम कोर्ट ने भारत – पाकिस्तान क्रिकेट मैच पर रोक लगाने से किया इनकार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 14 सितंबर को होने वाले भारत-पाकिस्तान टी-20 मैच को रद्द करने के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा, ‘मैच होने दीजिए. हम रोक नहीं लगाएंगे’. 4 एलएलबी छात्राओं की याचिका में पहलगाम आतंकी हमले समेत दूसरी घटनाओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान के साथ मैच को राष्ट्रीय भावनाओं का मजाक बताया गया था.

गुरुवार (11 सितंबर, 2025) को सुप्रीम कोर्ट से याचिका पर अर्जेंट हियरिंग का अनुरोध किया गया था. भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को दुबई में एशिया कप का टी20 क्रिकेट मैच होना है. जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई के सामने यह मामला रखा गया. याचिककार्ताओं की ओर से वकील ने बेंच से कहा, ‘रविवार को मैच होना है इसलिए याचिका को शुक्रवार को लिस्ट कर दिया जाए.’ इस पर कोर्ट ने कहा कि वह रोक नहीं लगाएंगे मैच होने दीजिए. वकील ने फिर से कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले को सूचीबद्ध किया जाए, लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया.

उर्वशी जैन के नेतृत्व में चार लॉ स्टूडेंट्स ने याचिका दायर कर कहा कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेलना राष्ट्रीय गरिमा और जनभावना के विपरीत संदेश देता है. भारत और पाकिस्तान 2025 एशिया कप के लिए 14 सितंबर को दुबई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगे.

याचिका में कहा गया है, ‘देशों के बीच क्रिकेट सद्भाव और मित्रता दिखाने के लिए होता है, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जब हमारे लोग मारे गए और हमारे सैनिकों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया, तो पाकिस्तान के साथ खेलने से विपरीत संदेश जाएगा कि जहां हमारे सैनिक अपनी जान कुर्बान कर रहे हैं, वहीं हम उसी देश के साथ खेल का जश्न मना रहे हैं जो आतंकवादियों को पनाह दे रहा है.’

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याचिकाकर्ताओं ने कहा, ‘इससे उन पीड़ितों के परिवारों की भावनाओं को भी ठेस पहुंच सकती है जिन्होंने पाकिस्तानी आतंकवादियों के हाथों अपनी जान गंवाई. राष्ट्र की गरिमा और नागरिकों की सुरक्षा मनोरंजन से अहम है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।