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एप्पल के सह संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल को मिला नया नाम कमला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. हिंदू धर्म के सबसे बड़े आयोजनों में से एक प्रयागराज महाकुंभ में दिवंगत एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल भी शामिल होंगी। वो आज 13 जनवरी को प्रयागराज पहुंचेंगी। उन्हें हिंदू नाम ‘कमला’ दिया गया है।

“दूसरी बार भारत आई हैं”

लॉरेन पावेल की यात्रा और प्रवास की जानकारी देते हुए आध्यात्मिक गुरु स्वामी कैलाशानंद जी महाराज ने कहा, “उन्होंने लॉरेन पावेल को एक हिंदू नाम कमला दिया है। वह यहां अपने गुरुजी से मिलने आ रही हैं। हमने उनका नाम कमला रखा है और वह हमारे लिए बेटी की तरह हैं। यह दूसरी बार है जब वह भारत आई हैं। वो अपने शिविर में कुछ दिन प्रवास करेंगी। वो अपने निजी कार्यक्रम से आ रही हैं।”

कौन सा गोत्र मिला है?

स्वामी कैलाशानंद जी महाराज ने बताया कि उन्हें अपने गुरु का गोत्र मिलने के बाद नया नाम दिया गया। लॉरेन पावेल की सनातन धर्म में गहरी रुचि है और वो उनकी बेटी की तरह हैं। उन्होंने कहा कि लॉरेन पावेल को अच्युत-गोत्र दिया गया है।

“संन्यासी की तरह रहेंगी”

स्वामी कैलाशानंद ने बताया कि लॉरेन ध्यान लगाने के लिए भारत आईं हैं। उन्हें अखाड़े की पेशवाई रस्म में शामिल किया जाएगा। दुनिया के सबसे धनी परिवारों में से एक से ताल्लुक रखने वाली लॉरेन महाकुंभ के दौरान संन्यासी की तरह रहेंगी। वो अमृत स्नान (14 जनवरी) और मौनी अमावस्या (29 जनवरी) के दौरान अमृत स्नान करेंगी।

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अपने गुरु के शिविर में रहेंगी लॉरेन

बता दें कि लॉरेन पॉवेला वाराणसी में हैं। महाकुंभ के आज पहले दिन वो प्रयागराज पहुंचेंगी। वो अपने गुरु स्वामी कैलाशानंद के शिविर में रहेंगी, जो निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर हैं। वो 29 जनवरी तक महाकुंभ के कई अनुष्ठानों में हिस्सा लेंगी।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।