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ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को 27 साल की सजा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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ब्रासीलिया. ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के बहुमत से 2022 का चुनाव हारने के बाद सत्ता में बने रहने के लिए तख्तापलट की साजिश रचने का दोषी ठहराया गया और कोर्ट ने उनको 27 साल की सजा सुनाई है। उनके द्वारा बनाए गए लोकलुभावन आंदोलन के लिए एक शक्तिशाली झटका था।

बोल्सोनारो को तीन दशक तक जेल में रहना होगा

ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों की पीठ के बहुमत से पारित इस संभावित फैसले के साथ बोल्सोनारो देश के इतिहास में लोकतंत्र पर हमला करने के लिए दोषी ठहराए जाने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति बन गए हैं। अब उन्हें लगभग तीन दशक तक जेल में रहना होगा, क्योंकि अभियोजकों ने उनके अब तक के सबसे जघन्य कृत्य को अवज्ञा का कृत्य बताया है। मोरेस और तीन अन्य न्यायाधीशों ने कई दिनों तक मतदान करके उसे दोषी ठहराया और अंतिम फैसला 4-1 से सुनाया, तत्पश्चात 27 वर्ष और तीन महीने की सजा सुनाई गई।

बोल्सोनारो एक पूर्व सेना कप्तान थे

बोल्सोनारो एक पूर्व सेना कप्तान थे और जिन्होंने 1964 से 1985 के बीच सैकड़ों ब्राजीलियाई लोगों की हत्या करने वाली सैन्य तानाशाही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई थी। दोषी करार दिए जाने से इस वर्ष फ्रांस की मरीन ले पेन और फिलीपींस के रोड्रिगो दुतेर्ते सहित अन्य स्थानों पर भी दक्षिणपंथी नेताओं ने इसकी निंदा की है।

बोल्सोनारो ने खुद को राजनीतिक उत्पीड़न के शिकार बताया

70 वर्षीय बोल्सोनारो, जिन्होंने बार-बार ब्राजील की 1964-1985 की तानाशाही की यादों को व्यक्त किया है, अपनी बेगुनाही का दावा करते हैं कहा कि वे राजनीतिक उत्पीड़न के शिकार हैं।

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साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।