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बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी लाल चंद सोहाग की हत्या

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ढाका. बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब ओल्ड ढाका इलाके में मिटफोर्ड अस्पताल के सामने भीड़ ने एक हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस हत्याकांड का एक चौंकाने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि आरोपी किस तरह जान निकल जाने के बाद शव के ऊपर कूद रहे हैं और खतरनाक तरीके से हमले कर रहे हैं।

हत्या का निर्मम वीडियो वायरल

लाल चंद सोहाग कबाड़ से जुड़े कारोबार करते थे। उनकी बांग्लादेश के बाजार में निर्मम हत्या कर दी गई। हत्याकांड को इतने भयावह तरीके से अंजाम दिया गया है कि कलेजा कांप उठे। वहां बड़ी संख्या में भीड़ मौजूद थी, लेकिन किसी ने आरोपियों को रोकने की कोशिश नहीं की। जब इस हत्याकांड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया और सरकार पर सवाल उठने लगे। वीडियो इतना बीभत्स है कि हम आपको दिखा भी नहीं सकते। इस हत्याकांड के बाद बांग्लादेश में भी लोग आक्रोशित हो उठे। कई जगहों पर छात्रों ने प्रदर्शन किया और सरकार की आलोचना की। जब मामले को लेकर विवाद अधिक बढ़ा, तो पुलिस ने दावा किया कि उसने पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इतना ही नहीं, उनके पास से अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं।

बहन ने दर्ज करवाया केस

लाल चंद की बहन मंजुआरा बेगम ने हत्या का मामला दर्ज कराया है, जिसमें कुल 19 आरोपियों के नाम हैं और 15–20 अज्ञात संदिग्ध भी शामिल हैं। घटना के वक्त मौजूद लोगों के अनुसार, लाल चंद को पहले उनकी दुकान से बाहर घसीटा गया, लोहे की छड़ों से हमला किया गया और फिर कंक्रीट के टुकड़ों से पीटा गया। जब लाल चंद की जान निकल गई, तो आरोपी उनके शरीर पर कूदने लगे।

क्यों हुआ था विवाद?

बताया जा रहा है कि पूरा विवाद व्यापार से जुड़ा हुआ है। पुलिस और परिवार के सदस्यों का कहना है कि पुराने ढाका के मिटफोर्ड क्षेत्र में स्क्रैप व्यापार और इलाके में नियंत्रण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके कारण दिनदहाड़े यह क्रूर हत्या हुई। लाल चंद सोहाग की पत्नी लकी अख्तर अब यही सवाल पूछ रही हैं कि आखिर कोई इतनी बेरहमी से किसी की जान कैसे ले सकता है?

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साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।