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उद्धव और राज ठाकरे समर्थकों ने हिंदी भाषी ऑटो ड्राइवर को पीटा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. महाराष्ट्र के पालघर जिले में एक प्रवासी ऑटो-रिक्शा चालक के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट का मामला सामने आया है। यह घटना विरार रेलवे स्टेशन के पास हुई, जहां शिवसेना यूबीटी और मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के समर्थकों ने एक ऑटो चालक को कथित तौर पर मराठी भाषा का अपमान करने पर पीट दिया। यह विवाद उस वीडियो के वायरल होने के बाद शुरू हुआ जिसमें उत्तर प्रदेश के निवासी भावेश पाडोलिया और एक प्रवासी ऑटो चालक के बीच बहस हो रही थी। वीडियो में ऑटो चालक स्पष्ट रूप से कहता नजर आ रहा है कि मैं हिंदी बोलूंगा, जब उससे पूछा गया कि वह मराठी में क्यों नहीं बोल रहा। पाडोलिया के अनुसार, उसने चालक से सार्वजनिक स्थान पर मराठी का इस्तेमाल न करने को लेकर सवाल किया था। इस पर चालक ने जवाब दिया कि वह हिंदी और भोजपुरी ही बोलेगा।

शिवसेना यूबीटी और मनसे समर्थकों ने की मारपीट

शनिवार को यह विवाद हिंसक रूप ले बैठा। विरार स्टेशन के पास शिवसेना यूबीटी और मनसे के कार्यकर्ताओं ने उस ऑटो चालक को घेर लिया और उसके साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट की। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला कार्यकर्ता भी थप्पड़ मारती नजर आ रही हैं। इसके बाद ऑटो चालक को भावेश पाडोलिया, उनकी बहन और महाराष्ट्र राज्य से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए मजबूर किया गया।

शिवसेना स्टाइल में जवाब दिया गया: उद्धव गुट नेता

विरार शहर के शिवसेना (UBT) प्रमुख उदय जाधव ने इस पूरी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि अगर कोई मराठी भाषा, महाराष्ट्र या मराठी मानुष का अपमान करेगा, तो उसे शिवसेना स्टाइल में जवाब मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि चालक ने महाराष्ट्र का अपमान किया था और उसे सबक सिखाया गया। यह घटना सार्वजनिक रूप से हुई और वीडियो वायरल भी है, लेकिन पालघर पुलिस ने अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया है। पुलिस ने कहा कि हमें वीडियो मिला है और हम जांच कर रहे हैं, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से अब तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।