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दक्षिण भारतीय अभिनेता श्रीनिवास राव का निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज सितारों में से एक कोटा श्रीनिवास राव ने आज अंतिम सांस ली। पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता कोटा श्रीनिवास राव लंबी बीमारी से जूझ रहे थे और  13 जुलाई को निधन हो गया। वे आखिरी बार 2023 में रिलीज़ होने वाली कन्नड़ फिल्म ‘कब्जा’ में दिखाई दिए थे। लेकिन यह राव की आखिरी फिल्म नहीं है। जी हां। इस दिग्गज अभिनेता को आप आखिरी बार बड़े पर्दे पर देख पाएंगे। कोटा श्रीनिवास राव की आखिरी फिल्म पवन कल्याण स्टारर ‘हरि हर वीर मल्लू’ है, जो महज 11 दिन बाद रिलीज होगी।

पवन कल्याण के साथ शेयर करेंगे स्क्रीन

तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों के अलावा, कोटा श्रीनिवास राव को हिंदी फिल्मों में उनके बेहतरीन अभिनय के लिए भी याद किया जाएगा। लेकिन उनके निधन के बाद, श्रीनिवास राव अभिनेता पवन कल्याण की फिल्म ‘हरि हर वीर मल्लू’ में बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। यह राव की आखिरी फिल्म होगी। इस एक्शन फिल्म में उनका किरदार छोटा सा है, लेकिन यह बेहद दमदार होने वाला है। श्रीनिवास ने बीमार होने के बावजूद यह फिल्म की। फिल्म करने की उनकी एक ही वजह थी, पवन कल्याण। वह पवन कल्याण को ना नहीं कह सकते थे। यह फिल्म 24 जुलाई को रिलीज होने वाली है।

पवन कल्याण ने दी श्रद्धांजलि

रविवार सुबह जब कोटा श्रीनिवास राव के निधन की खबर आई, तो दक्षिण के कई दिग्गज अभिनेता उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके आवास पर पहुंचे। इस मौके पर अभिनेता और राजनेता पवन कल्याण भी कोटा श्रीनिवास राव के घर पहुंचे। पवन कल्याण के चेहरे पर दुख साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कोटा श्रीनिवास राव के परिवार के साथ दुःख साझा किया।

कोटा श्रीनिवास लोकप्रिय हिंदी फिल्मों में भी नजर आए

कोटा श्रीनिवास राव ने बॉलीवुड में भी कई फिल्में कीं। इन फिल्मों में ‘रक्त चरित्र 1 और 2’ शामिल हैं। वह टाइगर श्रॉफ की फिल्म ‘बागी’ में भी नजर आए थे। इसके अलावा, उन्होंने ‘लक’ और ‘सरकार’ जैसी फिल्मों में भी अहम भूमिकाएं निभाईं। बता दें कि कोटा श्रीनिवास राव के निधन के बाद साउथ सिनेमा इंडस्ट्री में शोक की लहर छा गई और तमाम सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। पवन कल्याण भी एक्टर को श्रद्धांजलि पहुंचे थे।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।