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हमने पाकिस्तान के 214 सैन्य बंधकों को मार डाला : बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

क्वेटा. पाकिस्तान ने बलूचिस्तान प्रांत में ट्रेन हाईजैक की घटना दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है. इस बीच बलूच विद्रोहियों ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि पाकिस्तानी सेना के बंधक बनाए गए सभी 214 जवानों को मार डाला है. इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने कहा था कि ट्रेन हाईजैक में 31 लोग मारे गए हैं, जिनमें 18 सैनिक, 3 रेलवे कर्मचारी और 5 नागरिक शामिल हैं.

बलूच विद्रोहियों का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तानी सेना को युद्ध बंदियों की अदला-बदली के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. विद्रोहियों ने पाक सेना और देश की सरकार पर ढिठाई करने का आरोप लगाया. विद्रोहियों का कहना है कि हमेशा की तरह सेना और सरकार की वजह से सैनिकों की जान गई है. अहंकार दिखाया और वो अपनी जिद पर अड़े रहे.

अल्टीमेटम देने के बाद भी सेना और सरकार ने बात नहीं की

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कहा कि अल्टीमेटम देने के बाद भी सेना और सरकार ने कोई बातचीत नहीं की और जमीनी हकीकत जानते हुए भी अपनी आंखें बंद कर ली. उन्होंने कहा कि सेना और पाक सरकार की इसी जिद के चलते सभी 214 बंधकों को मार दिया गया है. इसके जिम्मेदार वो लोग खुद हैं. विद्रोहियों ने कहा कि BLA ने हमेशा युद्ध के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक काम किया है, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने अपने सेनिकों की जान बचाने की बजाय उन्हें युद्ध की भेंट चढ़ाना सही समझा.

BLA ने अपने जवानों को बताया शहीद

BLA ने कहा कि इस जिद का खामियाजा पाक सरकार और सेना को अपने 214 जवानों की मौत की शक्ल में भुगतना पड़ा है. इसके साथ ही विद्रोहियों ने ये भी बताया कि पाकिस्तानी सेना के साथ संघर्ष में उनके 12 जवानों की मौत हो गई है, जिन्हें वो श्रद्धांजलि देते हैं. BLA का कहना है कि उसके लोगों ने दुश्मन के बलिदान दिया. BLA ने अपने जवानों को शहीद का दर्जा देते हुए उन्हें स्वतंत्रता सेनानी करार दिया. उसने कहा कि बुधवार रात 3 और गुरुवार रात उसके 4 स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए. BLA ने बताया कि मजीद ब्रिगेड के 5 फिदायीनों ने भी अपनी जान कुर्बान करके दुश्मन को मुंह तोड़ जवाब दिया है, जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा. BLA ने कहा कि इनकी शहादत को कभी नहीं भुला पाएंगे.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।