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बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के काफिले पर हमला, कई सैनिक मारे गए

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

क्वेटा. पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 24 घंटे में दूसरी बार पाकिस्तानी सेना पर हमला हुआ है. केच जिले में हुए इस हमले में कई जवान घायल हो गए हैं जबकि कुछ के मारे जाने की भी खबर है. हमलावरों ने पाक सेना के काफिले पर बम से हमला किया. ये हमला उस समय हुआ जब पाक सेना पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति से जूझ रही थी क्योंकि इससे पहले बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान के बंधक बनाए गए 214 जवानों की हत्या का दावा किया था.

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने शुक्रवार (14 मार्च) को पाकिस्तान की ओर से बंधक बनाए गए सभी 214 जवानों को मारने का दावा किया था. BLA का कहना था कि पाकिस्तान सेना ने उनकी मांगों का जवाब नहीं दिया और इसलिए उनकी जिद की वजह से यह घटना घटी. BLA ने पाकिस्तान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था कि अगर सेना उनके जवानों की अदला-बदली नहीं करती तो वे बंधकों को मार देंगे. पाकिस्तान सरकार और सेना ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया जिससे बलूचिस्तान में ये भयंकर घटना घटित हुई.

बलूचिस्तान ट्रेन हमले में 26 बंधक मारे गए

पाकिस्तान सेना ने इस हमले के बाद बयान जारी कर कहा कि बलूचिस्तान ट्रेन हमले में मारे गए 26 बंधकों में से 18 सुरक्षाकर्मी थे. सेना के प्रवक्ता ने कहा कि उग्रवादियों ने इन 26 बंधकों को मार डाला था जिनमें सरकारी अधिकारी और नागरिक भी शामिल थे. इसके बाद पाक सेना ने 33 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया और 354 बंधकों को बचाने का भी दावा किया. इसमें से 37 घायल यात्री भी शामिल थे.

जाफर एक्सप्रेस पर BLA का घातक हमला

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पहले जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाया था. 11 मार्च को ये ट्रेन क्वेटा से पेशावर जा रही थी और इसमें 400 से ज्यादा यात्री सवार थे. जब ट्रेन बलूचिस्तान के बोलन इलाके में एक टनल से गुजर रही थी तब बीएलए के उग्रवादियों ने घात लगाकर उस पर हमला किया. इस हमले में 58 लोग मारे गए थे जिनमें 21 यात्री शामिल थे. बीएलए के इस हमले ने पाकिस्तान के सुरक्षा हालात को और भी ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।