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जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बयान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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आज, मैं हाशमाइट किंगडम ऑफ जॉर्डन के, फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ इथियोपिया और सल्तनत ऑफ ओमान की तीन देशों की यात्रा पर जा रहा हूं, ये तीनों ऐसे देश हैं जिनके साथ भारत के व्यापक समकालीन द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पुराने सभ्यतागत संबंध हैं।

सबसे पहले, मैं महामहिम किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन के निमंत्रण पर जॉर्डन जाऊंगा। यह ऐतिहासिक यात्रा हमारे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 साल पूरे होने का प्रतीक होगी। अपनी यात्रा के दौरान, मैं महामहिम किंग अब्दुल्ला द्वितीय इब्न अल हुसैन, जॉर्डन के प्रधानमंत्री महामहिम श्री जाफ़र हसन के साथ विस्तृत चर्चा करूंगा और महामहिम क्राउन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय के साथ भी मुलाकात करूंगा। अम्मान में, मैं जीवंत भारतीय समुदाय से भी मिलूंगा, जिन्होंने भारत-जॉर्डन संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अम्मान से, इथियोपिया के प्रधानमंत्री महामहिम डॉ. अबी अहमद अली के निमंत्रण पर, मैं फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ इथियोपिया की अपनी पहली यात्रा करूंगा। अदीस अबाबा अफ्रीकी संघ का मुख्यालय भी है। 2023 में, भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान, अफ्रीकी संघ को जी20 के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। अदीस अबाबा में, मैं महामहिम डॉ. अबी अहमद अली के साथ विस्तार से बातचीत करूंगा और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा। मुझे संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने का भी सौभाग्य मिलेगा, जहां मैं “लोकतंत्र की जननी” के रूप में भारत की यात्रा और भारत-इथियोपिया साझेदारी ग्लोबल साउथ के लिए क्या मूल्य ला सकती है, इस पर अपने विचार साझा करने के लिए उत्सुक हूं।

अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव में, मैं सल्तनत ऑफ ओमान जाऊंगा। मेरी यह यात्रा भारत और ओमान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 साल पूरे होने का प्रतीक होगी। मस्कट में, मैं ओमान के महामहिम सुल्तान के साथ अपनी बातचीत का इंतजार कर रहा हूं और हमारी रणनीतिक साझेदारी के साथ-साथ हमारे मजबूत वाणिज्यिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद करता हूं। मैं ओमान में भारतीय समुदाय की एक सभा को भी संबोधित करूंगा, जिसने देश के विकास और हमारी साझेदारी को बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।