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महाकुंभ में रविवार को 1.36 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, 19 फरवरी को राहुल व प्रियंका गांधी भी आएंगे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. आज महाकुंभ का 35वां दिन है। शाम 6 बजे तक 1.36 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। 13 जनवरी से अब तक 52.83 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के साथ महाकुंभ का समापन होगा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय रविवार को इटावा में थे। मीडिया ने उनसे पूछा कि राहुल और प्रियंका कब महाकुंभ जाएंगे। अजय राय ने कहा- 19 फरवरी को हम लोग जा रहे हैं। हर-हर महादेव होगा।

महाकुंभ में आज रविवार की छुट्टी होने के चलते जबरदस्त भीड़ है। चेन बनाकर पुलिसकर्मी भीड़ के आगे चल रहे हैं। इससे भीड़ धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए ये तरीका अपनाया जा रहा है। संगम में श्रद्धालुओं से भरी एक नाव दूसरी नाव से टकरा कर पलट गई। पांच लोग डूबने लगे। NDRF ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। सुरक्षा में लगे जवान जगह-जगह रस्सी लगाकर श्रद्धालुओं को रोककर दूसरे घाटों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। भीड़ की वजह से 8वीं तक के स्कूलों में 4 दिन की छुट्‌टी और बढ़ा दी गई है। अब 20 फरवरी तक स्कूल बंद रहेंगे।

शहर के बाहर गाड़ी पार्क करनी पड़ रही। आगे वाहनों की एंट्री रोकी गई है। पार्किंग और स्टेशन से करीब 10 किमी तक पैदल ही संगम तक जाना पड़ रहा है। सीएम योगी भी आज महाकुंभ पहुंचे। उन्होंने हेलिकॉप्टर से शहर के बार से लेकर मेला क्षेत्र तक का जायजा लिया। लोगों से अपील की गाड़ी सड़क पर नहीं, पार्किंग में ही खड़ी करें। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और धर्मेंद्र प्रधान ने संगम में डुबकी लगाई।

साभार : दैनिक भास्कर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।