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कॉमेडियन समय रैना और युट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया साइबर सेल के सामने हुए पेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. इंडियाज गॉट लेटेंट विवाद को लेकर अभी तक कानूनी कार्रवाई जारी है. कंट्रोवर्सी के काफी समय बाद रणवीर इलाहाबादिया ने अपने पॉडकास्ट पर वापसी कर ली है. इस बीच अब उन्होंने समय रैना के साथ एक बार फिर महाराष्ट्र साइबर सेल को बयान दर्ज कराया है. कॉमेडियन समय रैना और युट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया को महाराष्ट्र साइबर सेल ने एक नहीं, बल्कि तीन-तीन बार समन भेजा है. सेल ने आज तीसरी बार दोनों को अपना बयान दर्ज करने के लिए बुलाया था. सूत्रों ने बताया कि दोनों ही महाराष्ट्र साइबर ऑफिस अपना बयान दर्ज करवाने के लिए पहुंचे हैं. एजेंसी ने पहले भी रणवीर और समय रैना का स्टेटमेंट रिकॉर्ड किया था. इसके अलावा आशीष चंचलानी और अपूर्वा मखीजा के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं.

महाराष्ट्र साइबर सेल के सामने पेश हुए पांचो पैनलिस्ट

रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना के अलावा शो के पांचो पैनलिस्ट भी महाराष्ट्र साइबर सेल के सामने पेश हुए थे. समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया, अपूर्वा मखीजा, जसप्रीत सिंह समेत आशीष चंचलानी ने महाराष्ट्र साइबर में अपना बयान दर्ज कराया है. अपूर्वा मखीजा ने स्टटेमेंट रिकॉर्ड कराकर घर चली गई हैं.

रणवीर इलाहाबादिया का इमोशनल पोस्ट

रणवीर इलाहाबादिया ने इससे पहले सोशल मीडिया पर एक इमोशनल पोस्ट किया था. यूट्यूबर ने अपनी बचपन की फोटो, अपनी सोलो पिक्स और फैमिली मेंबर्स के साथ अपनी फोटोज शेयर की थीं. इसके साथ कैप्शन में लिखा था- ‘इस आदमी के लिए नोट जिंदगी एक तूफान है. उतार-चढ़ाव को एंजॉय करें. उतार-चढ़ाव से सीखें. अपने साथ खड़े लोगों का ख्याल रखें. हर बाधा के बाद आगे बढ़ें. हर चैप्टर को शेर की तरह जिएं. कभी पीछे न हटें. नीचे. रण-वीर: युद्ध के मैदान में बहादुर.’ बता दें कि हाल ही में रणवीर इलाहाबादिया ने पॉडकास्ट पर वापसी की है. इससे पहले उन्होंने सभी से अपनी गलतियों की माफी मांगी थी. वहीं अपूर्वा मखीजा ने भी लंबे ब्रेक के बाद यूट्यूब पर वापसी की है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।