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अब तुर्की में नहीं होगी भारतीय फिल्मों की शूटिंग, कलकारों का भी बहिष्कार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. भारत के पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच जब तुर्की ने हमारे पड़ोसी और दुश्मन देश पाकिस्तान का साथ दिया तो फिर भारत ने पकिस्तान के साथ ही तुर्की की भी अक्ल ठिकाने लगा दी. भारत और पाक की लड़ाई में तुर्की लगातार पाकिस्तान को समर्थन दे रहा है. बताया जा रहा है कि तुर्की ने पाक को सैन्य मदद की भी की थी. लेकिन भारत ने तुर्की को भी सबक सिखाना शुरू कर दिया है. भारत की तरफ से तुर्की के खिलाफ कई कड़े एक्शन लिए जा रहे हैं और तुर्की का बायकॉट शुरू कर दिया गया है. वहीं इंडियन फिल्म इंडस्ट्री ने भी तुर्की को बड़ा झटका दे दिया है. ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने तुर्की में किसी भी भारतीय फिल्म, टेलीविजन शो की शूटिंग पर बैन लगा दिया है.

तुर्की में नहीं होगी भारतीय फिल्मों-शो की शूटिंग

तुर्की हमारे सामने हमारे दुश्मन देश की मदद रहा है तो उसको मुंहतोड़ जवाबा देना बेहद जरूरी है. हर तरफ और हर क्षेत्र से तुर्की का बहिष्कार शुरू कर दिया है. अब इंडियन फिल्म इंडस्ट्री भी आगे आई है. भारतीय फिल्मों और शो की तुर्की में शूटिंग के साथ ही AICWA ने तुर्की के कलाकारों और प्रोडक्शन हाउस के साथ काम करने पर भी बैन का ऐलान किया है. वहीं किसी भी तरह के डिजिटल कंटेंट की शूटिंग भी तुर्की में अब नहीं होगी.

AICWA ने कहा- हम हमेशा देश के साथ खड़े रहे हैं

AICWA ने अपने बयान में कहा, ”हम हमेशा देश के साथ खड़े रहे हैं. तुर्की का पाकिस्तान के साथ खुला गठबंधन, खासकर आतंक और अस्थिरता के समय में, अनदेखा नहीं किया जा सकता. भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ऐसे किसी भी देश का समर्थन या उससे जुड़ाव नहीं करेगा जो भारत की संप्रभुता के खिलाफ खड़ा हो.”

तुर्की में शूट हो चुकी हैं ये भारतीय फिल्में

तुर्की के खिलाफ अभी भारत में बायकॉट तुर्की अभियान चल रहा है. हालांकि इस देश में भारतीय स्टार्स पहले शूटिंग कर चुके हैं. यहां पर सैफ अली खान खान की रेस 2 और सलमान खान की टाइगर 3 के अलावा बेबी, दिल धड़कने दो, गेम, गुरु सहित और भी कई भारतीय फिल्मों को फिल्माया गया है. हालांकि अब इस पर AICWA की तरफ से लगाम लगा दी गई है.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।