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पाकिस्तानी सेना के हमले में खैबर पख्तूनख्वा में एक बच्चे की मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

पेशावर. पूरी दुनिया ने गुरुवार को फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का दोगलापन देखा. जानते हैं कैसे. दरअसल एक तरफ मुनीर और उसकी कठपुतली सरकार यौम-ए-आजादी का जश्न मना रही थी. दूसरी तरफ पाकिस्तान अवाम पर बम बरसाए जा रहे थे. इस्लामाबाद में रंगा-रंग कार्यक्रम चल रहे थे. वहीं दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा में मोर्टार चल रहे थे. आजादी का जश्न गम में तब बदला, जब मुनीर के मिलिट्री ऑपरेशन में 7 साल के एक बच्चे की मौत हो गई.

आजादी के दिन अपने लोगों पर की बमबारी

इसे मुनीर एंड मंडली की बेशर्मी ना करें तो फिर क्या कहें. एक तरफ पाकिस्तानी हुक्मरान आजादी का जश्न मना रहे थे. दूसरी तरफ पाकिस्तान की ही अवाम पर बम बरसा रहे थे. महज सात साल की उम्र थी इस बच्चे की. मगर अपने इगो के चक्कर में मुनीर ने इसे मार डाला. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के तमाम बुद्धिजीवियों ने मना किया था कि आजादी के दिन सेना का ऑपरेशन रोक दिया जाए. मगर मुनीर नहीं माना और अपने घरों को बचाने की मांग कर रहे KP के लोगों पर बमबारी कर दी.

40 ठिकानों पर पाक फौज ने की बमबारी

दावा किया जा रहा है कि मुनीर की सेना ने TTP के खिलाफ 9 ठिकानों पर ऑपरेशन लॉन्च किया था. जिसे बाद में बढ़ाकर 40 कर दिया गया. आजादी के दिन खैबर पख़्तूनख्वा की अवाम इस ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं थी. दावा है कि मुनीर की सेना ने अचानक हमला किया और कहर ढा दिया है. यौम-ए-आजादी के दिन कितने बेगुनाहों की मौत हुई है. इसी अभी गिनती तक नहीं हो सकी है.

PTI कार्यकर्ताओं की जमकर पिटाई

जानते हैं मुनीर एंड मंडली सिर्फ केपी में ही बेकाबू नहीं हुई है बल्कि इस्लाबाद में भी मुनीर के फौजियों ने खूब बहरपाया. इमरान की रिहाई के लिए उनकी पार्टी सड़क पर उतरी थी. जो आजादी के दिन इमरान की आजादी की मांग कर रही थी. हजारों लोगों का काफिला जब पंजाब की अडियाला जेल की तरफ बढ़ने लगा तो पंजाब पुलिस के साथ मिलकर मुनीर की सेना उपर टूट पड़ी.

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महिलाओं की घसीटकर हुई गिरफ्तारी

बताया जा रहा है कि इस प्रोटेस्ट के दौरान भी किसी के पीटा गया. किसी को घसीटा गया. इस पर भी मन नहीं भरा तो महिलाओं तक को गिरफ़्तार कर लिया गया. अडियाला जेल के बाहर से इमरान खान की बहन अलीमा खान को भी गिरफ्तार किया. PTI के समर्थकों ने साफ ऐलान कर दिया है. अब मुनीर के आगे झुकने का सवाल ही नहीं है यानी हंगामा और तेज होगा.

साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।