लोड हो रहा है...

पाकिस्तान ने की भारतीय खिलाड़ियों के हाथ न मिलाने की शिकायत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. 14 सितंबर को एशिया कप में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से हरा दिया था. मुकाबला समाप्त होने के बाद टीम इंडिया के प्लेयर्स ने पाकिस्तान टीम के साथ हाथ नहीं मिलाया (India vs pakistan no hand shake) था. बाद में खबर आई कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने एशियाई क्रिकेट काउंसिल से इस घटना की शिकायत कर दी है. अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि BCCI के पास ऐसी किसी शिकायत का नोटिस आया ही नहीं है. पाकिस्तान ने एशियाई क्रिकेट काउंसिल में शिकायत दर्ज कारवाई है. अब टाइम्स नाउ के हवाले से बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया है कि एशियाई क्रिकेट काउंसिल ने बीसीसीआई को ऐसी किसी शिकायत का नोटिस नहीं भेजा है. ना ही हैंडशेक विवाद और ना ही दरवाजा बंद करने को लेकर शिकायत का मैसेज आया है.

मैच से पहले ही शुरू हो गया था विवाद

मैच के बाद हैंडशेक ना होने पर जमकर बहस छिड़ी है, लेकिन विवाद मुकाबले से पहले ही शुरू हो गया था. दरअसल टॉस के समय आमतौर पर दोनों कप्तान हाथ मिलाते हैं, लेकिन सूर्यकुमार यादव और सलमान आगा ने हाथ मिलाना तो दूर, एक-दूसरे की तरफ देखा तक नहीं. वहीं जब सूर्यकुमार यादव और शिवम दुबे, पाकिस्तानी प्लेयर्स से हाथ मिलाए बिना ड्रेसिंग रूम में चले गए तो मामले ने तूल पकड़ा. भारतीय टीम ने ड्रेसिंग रूम में जाकर दरवाजा तक बंद कर लिया था, जिसपर विवाद और ज्यादा गरमा गया.

कप्तान सूर्यकुमार ने दिया था कड़ा संदेश

मैच के बाद भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा था कि, “हमारी सरकार और BCCI एकमत हैं. हम यहां सिर्फ मैच खेलने आए थे और लगता है कि हमने बिल्कुल सही जवाब दिया है. खेल भावना के अलावा भी जीवन में कुछ चीजें होती हैं. हम पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए सभी लोग और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं. मैं इस जीत को उन सभी भारतीय जवानों को समर्पित करना चाहता हूं, जो ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा रहे.”

साभार : एबीपी न्यूज

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।