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बिहार में कांग्रेस के कारण महागठबंधन से नाराज हुए मुकेश सहनी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. महागठबंधन में सीटों का बंटवारा करीब-करीब तय हो चुका है। लेकिन कांग्रेस ने कई सीटों पर अब तक मामला फंसा कर रखा है। कांग्रेस की रणनीति के फेर में विकासशील इंसान पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी भी फंसे हुए हैं। लगातार 60 सीट और उप मुख्यमंत्री की पद की मांग उठाते रहे हैं। परंतु अब जबकि नामांकन का एक दिन बचने के बाद भी अपनी स्थिति साफ न होते देख सहनी ने बागी तेवर अपना लिए हैं। जिसके बाद उन्हें मनाने का सिलसिला शुरू हो गया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन कार्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष तेजस्वी यादव मुकेश सहनी को लगातार बढ़ावा देते रहे हैं। लेकिन सीटों पर मामला फंसने के बाद तेजस्वी ने बीच का रास्ता निकाला और सहनी को 18 सीटें देने की बात सामने आई। सूत्र बताते हैं कि 18 में 10 सीटें राजद के कोटे से जबकि आठ सीटें कांग्रेस के कोटे से देने की बात हो रही थी। बावजूद सहनी को कोई स्पष्ट संदेश नहीं मिल रहा था कि उनके प्रत्याशियों का कब से सिंबल दिया जाना है और कब से प्रत्याशी नामांकन करेंगे।

लगातार इंतजार के बाद आखिरकार सहनी ने गुरुवार को आनन-फानन में पटना में एक प्रेस कांफ्रेंस बुला ली। सहनी के मात्र प्रेस कांफ्रेंस बुलाने से महागठबंधन खेमे में हड़कंप मच गई। सूत्रों की माने तो कांग्रेस के एक बड़े नेता का फोन सहनी को आया और उनसे कुछ घंटों की मोहलत मांगी गई। जिसके बाद सहनी ने 12 बजे से बुलाई गई अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस का समय बढ़ाकर चार बजे कर दिया है। सूत्रों की माने तो सहनी को मनाने की कोशिश की जा रही है। अब देखना यह होगा कि सहनी का निर्णय क्या होता है और अंतिम समय में उनकी झोली में क्या और कितना गिरने वाला है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।