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एक बार फिर सैम पित्रोदा ने दिया विवादित बयान, कांग्रेस ने फिर किया किनारा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने चीन को लेकर ऐसा बयान द‍िया क‍ि भारत में सियासी तूफान मच गया. बीजेपी ने कांग्रेस और राहुल गांधी को घेर ल‍िया. पूछा-चीन से पैसे लेते हो जो बार-बार इतनी तारीफ करते रहते हो. कांग्रेस ने इस बार भी सैम प‍ित्रोदा के बयान से क‍िनारा कर ल‍िया. पार्टी महासच‍िव जयराम रमेश ने कहा-सैम प‍ित्रोदा ने जो कहा, वो कांग्रेस के विचार नहीं है. लेकिन यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस को सैम पित्रोदा के बयान के ल‍िए सॉरी कहना पड़ा हो. इससे पहले भी वे कई बार विवाद‍ित बयान दे चुके हैं. कांग्रेस क‍िनारा भी करती रही है. उन्‍हें पद से भी हटाया लेकिन फ‍िर वे लाडले बने रहे.

पहले जान‍िए सैम पित्रोदा ने कहा क्‍या?

सैम पित्रोदा ने कहा- ‘मुझे नहीं पता कि चीन से क्या खतरा है. मुझे लगता है कि इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, क्योंकि अमेरिका को हमेशा दुश्मन की पहचान करनी होती है. हमें सीखने, संवाद बढ़ाने, सहयोग करने और मिलकर काम करने की जरूरत है, हमें ‘कमांड और कंट्रोल’ की मानसिकता से बाहर निकलना होगा.’ इसी पर बीजेपी ने बवाल मचा द‍िया. पूछा-आपको चीन इतना पसंद क्‍यों आता है?

कांग्रेस की सॉरी

बवाल बढ़ा तो कांग्रेस ने क‍िनारा कर ल‍िया. कांग्रेस महासच‍िव जयराम रमेश ने एक्‍स पर लिखा, सैम पित्रोदा ने चीन पर जो कुछ भी कहा, वह निश्च‍ित तौर पर कांग्रेस का विचार नहीं है. चीन हमारी विदेश नीत‍ि, बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक चुनौती भी है. कांग्रेस ने चीन के प्रति मोदी सरकार के दृष्टिकोण पर बार-बार सवाल उठाए हैं. हमने तब भी सवाल उठाए, जब पीएम मोदी ने 19 जून, 2020 को सार्वजन‍िक तौर पर चीन को क्‍ल‍िन च‍िट दे दी. 28 जनवरी को भी हमने सवाल उठाए. यह बेहद अफसोसजनक है क‍ि संसद में इस पर चर्चा करने का मौका नहीं द‍िया जाता.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।