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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ मामले पर सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ का मामला गरमाया हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल हुई है। याचिका में मांग की गई है कि केंद्र और सभी राज्य मिलकर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाएं, जो क्राउड मैनेजमेंट और भगदड़ रोकने के लिए गाइडलाइन तैयार करें। सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने ये जनहित याचिका दाखिल की है। जनहित याचिका में भारतीय रेलवे को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह रेलवे स्टेशनों और प्लेटफार्मों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए उपाय करे, जिसमें गलियारों को चौड़ा करना, बड़े ओवरब्रिज और प्लेटफार्मों का निर्माण करना, रैंप और एस्केलेटर के माध्यम से प्लेटफार्मों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना, व्यस्त समय के दौरान आगमन या प्रस्थान प्लेटफार्मों में किसी भी तरह के बदलाव से सख्ती से बचना शामिल है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर किए गए 5 बदलाव

  • प्लेटफार्म टिकट बंद कर दिया गया है।
  • ⁠टिकट चेक करने के बाद ही प्लेटफार्म पर एंट्री मिलेगी।
  • ⁠ट्रेन आने से पहले कतार की व्यवस्था होगी।
  • ⁠स्टेशन के बाहर वेटिंग एरिया बनाया जाएगा। (छठ पूजा की तरह)
  • ⁠प्लेटफार्म नंबर 16 और 15 पर एस्कलेटर बंद कर दिए गए हैं।

नई दिल्ली स्टेशन पर मची भगदड़ से हुई थी 18 लोगों की मौत

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार की रात भगदड़ मचने से तीन बच्चों सहित 18 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। मृतकों में सबसे ज्यादा महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मृतकों में सबसे ज्यादा लोग बिहार से हैं और इनकी संख्या नौ बताई जा रही है। वहीं मृतकों में दिल्ली के आठ और एक शख्स हरियाणा का रहने वाला था। भगदड़ की घटना रात करीब 10 बजे के आसपास प्लेटफार्म 13 और 14 पर घटी, जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज महाकुंभ में जाने के लिए स्टेशन पर पहुंचे थे और ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।