लोड हो रहा है...

पर्यावरण विनाश के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं : अभय जैन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

भोपाल. इंदौर की कम होती हरियाली और बिगड़ते पर्यावरण पर आयोजित एक कार्यक्रम में जनहित पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय जैन ने अपने विचार रखें। उन्होंने बताया कि पर्यावरण विनाश के लिए सरकार की उपभोक्तावादी और उद्योग, व्यापार, संपत्ति का कुछ स्थान और कुछ व्यक्तियों के पास केंद्रीकरण की पूंजीवादी और उपभोगवादी नीतियां जिम्मेदार है।

इससे मुकाबला करने के लिए हमें अपने व्यक्तिगत जीवन में सादगी, सामाजिक आयोजनों में पर्यावरण केंद्रित व्यवस्थाएं और शासन की नीतियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, उद्योग, धन-संपत्ति का विकेंद्रीकरण कर भारतीय विचार प्रणाली को अपनाने पर बल देना होगा। जिसमें व्यक्ति – समाज – प्रकृति तथा परमेष्ठी में सामान्जस्य बिठाने वाली विचार प्रणाली द्वारा, जीवन की सभी व्यवस्थाओं का निर्माण करना होता है।

अभी तो पश्चिम द्वारा उधार ली गई विचार प्रणाली जो व्यक्ति, समाज और प्रकृति में संघर्ष पर आधारित है और इससे पर्यावरण का विनाश निश्चित है और वह दिख भी रहा है। दुनिया की पूरी आबादी की इच्छाओं की पूर्ति के संसाधन के लिए तो यह धरती कम ही पड़ जाएगी। विकेंद्रित व्यवस्था तथा संयमित उपभोग ही इसका समाधान है।

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

- Advertisement -

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।