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नाटो चीफ मार्क रूट ने भारत पर 100% प्रतिबंध लगाने की दी धमकी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

वॉशिंगटन. नाटो चीफ मार्क रूट ने भारत को रूस के साथ संबंधों को लेकर खुली चेतावनी दी और कहा कि अगर वह रूस के साथ व्यापार जारी रखता है तो गंभीर आर्थिक दंड (सेकंडरी सैंक्शन) का सामना करना पड़ सकता है। भारत के साथ ही उन्होंने चीन और ब्राजील का भी नाम लिया। खास बात ये है कि ये सभी ब्रिक्स समूह के देश हैं। भारत पहले भी कह चुका है कि वह अपने व्यापारिक संबंधों को राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए महत्व देता है। बुधवार को अमेरिकी सीनेटरों से मुलाकात के बाद पत्रकारों के साथ बाचतीत में रूट ने भारत, चीन और ब्राजील के नेताओं से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर शांति वार्ता को गंभीरता से लेने के लिए दबाव डालने का आग्रह किया।

भारत के खिलाफ 100% सेकंडरी टैरिफ

रूट ने कहा, ‘अगर आप चीन के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री या ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और रूस के साथ व्यापार करना और उनका तेल व गैस खरीदना जारी रखते हैं तो आपको पता होना चाहिए, अगर मॉस्को में बैठा व्यक्ति शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं लेता है तो मैं 100 प्रतिशत सेकंडरी प्रतिबंध लगा दूंगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इन तीन देशों के लिए मेरा विशेष प्रोत्साहन यह है कि अगर आप बीजिंग या दिल्ली में रहते हैं या आप ब्राजील के राष्ट्रपति हैं, तो आप इस पर गौर करना चाहेंगे, क्योंकि यह आपको बहुत प्रभावित कर सकता है।’

पुतिन से बात करने की अपील

रूट ने भारत और दोनों अन्य देशों के नेताओं से पुतिन से शांति वार्ता के लिए सीधे तौर पर आग्रह करने अपील की। उन्होंने कहा, ‘प्लीज व्लादिमीर पुतिन को फोन करें और उन्हें बताएं कि उन्हें शांति वार्ता को लेकर गंभीर होना होगा, वरना इसका ब्राजील, भारत और चीन पर बड़े पैमाने पर असर होगा।’

ट्रंप ने भी दी थी टैरिफ की धमकी

नाटी चीफ की टिप्पणी के एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और उसके व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ 100 प्रतिशत सेकंडरी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही वॉइट हाउस ने नाटो के माध्यम से यूक्रेन को नए हथियारों की सप्लाई की मंजूरी भी दी थी। वॉइट हाउस ने बताया कि ट्रंप की योजना में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम जैसे खतरनाक हथियार भेजना शामिल हैं। कीव इन हथियारों को रूसी हवाई हमलों का मुकाबला करने के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।