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पाकिस्तान ने तुर्की से 90 करोड़ डॉलर की ड्रोन डील की रद्द

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. पाकिस्तान को दुनिया क्यों धोखेबाज मुल्क मानती है. इसकी सबसे नई मिसाल तुर्किए से सामने आई है क्योंकि जो छोटा खलीफा पाकिस्तान के बुरे वक्त में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा था. उस तुर्किए को भी पाकिस्तान ने चकमा दे दिया. साफ-साफ कहें तो धोखा दे दिया. दरअसल पाकिस्तान ने तुर्किए के साथ 90 करोड़ डॉलर की ड्रोन डील की थी. मगर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह इन ड्रोन्स को निशाना बनाया गया. उसके बाद पाकिस्तान ने तुर्किए में तैयार ड्रोन लेने से ही मना कर दिया है.

भारत पाकिस्तान के बीच जंग में बड़े चौधरी बन रहे तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन, लेकिन पता है पाकिस्तान ने उनके साथ क्या किया है. दरअसल खुद को तीस मार खां मुल्क समझने वाले इस मुल्क ने पाकिस्तान के साथ 90 करोड़ डॉलर की एक डील की थी. इस डील के तहत पाकिस्तान तुर्किए से ड्रोन खरीदना चाहता था. युद्ध के हालात में तुर्किए ने 100-200 के करीब ड्रोन पाकिस्तान को भिजवा भी दिए. मगर जब पाकिस्तान ने असिसगार्ड सोंगर ड्रोन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया तो भारत के डिफेंस सिस्टम ने उन्हें धूल में मिला दिया. तुर्किए के तमाम ड्रोन औंधे मुंह कहीं खेत में पड़े मिले तो कहीं आसमान में ही तबाह हो गए. लिहाज़ा अब पाकिस्तान ने तुर्किए के घटिया ड्रोन खरीदने से इनकार कर दिया है.

पाकिस्तान का उठा तुर्की से भरोसा

मतलब तुर्किए में पाकिस्तान का माल तैयार पड़ा है और पाकिस्तान इसे लेने को तैयार नहीं है. जिससे भड़के तुर्किए के विदेश मंत्री हाकन फिदान और रक्षा मंत्री यासर गुलर पाकिस्तान पहुंचे. तैयार हो चुके ड्रोन्स को खरीदने के लिए दबाव बनाया. मगर ख़बर है कि पाकिस्तान ने उन्हें साफ-साफ समझा दिया कि वो तुर्किए का घटिया माल नहीं खरीदने वाला है. अगर कोई अच्छी डील हो तो बताओ.

एडवांस बायरकटार टीबी2 की चाहत

बता दें कि पाकिस्तान की नज़र तर्किए के एडवांस बायरकटार टीबी2 है. पाकिस्तान चाहता है कि तुर्किए इसी डील में  बायरकटार  ड्रोन मुहैया कराए. लेकिन तुर्किए फिलहाल इसके लिए तैयार नजर नहीं आ रहा है. वैसे कहा तो ये भी जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने जिस तरह तर्किए के ड्रोन्स को तबाह किया. उसके बाद पाकिस्तान का टर्किश ड्रोन से भरोसा उठ गया और अब वो बहाना बनाकर छोटे खलीफा से पीछा छुड़ाना चाहता है. मगर एर्दोगन भी बड़े खिलाड़ी हैं. लगता नहीं कि वो पाकिस्तान का इतनी आसानी से पीछा छोड़ेगा.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।