लोड हो रहा है...

सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन रणवीर इलाहाबादिया को लगाई फटकार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया (Ranveer Allahbadia) की ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (Indias Got Latent) शो  में अश्लील मजाक को लेकर जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने यूट्यूबर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सवाल किया कि अगर यह अश्लील नहीं है, तो क्या है? कोर्ट ने इसके साथ-साथ यूट्यूबर को गिरफ्तारी से अंतिरम राहत भी दे दी है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट रणवीर इलाहाबादिया की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साल क्लब करने की मांग की थी.

सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ‘ऐसा लगता है कि दिमाग में कुछ गंदगी है, जिसके चलते ये टिप्पणी की गई है. पॉपुलर होने का मतलब ये नहीं कि आप कुछ भी टिप्पणी करें. आप लोगों के माता पिता की बेइज्जती कर रहे हैं. दिमाग में जो गंदगी है, वो इस प्रोग्राम के जरिये बाहर आई है, ऐसी सूरत में कोर्ट तुम्हें राहत क्यों दे?

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिस तरह की टिप्पणी रणवीर ने की है, बेटियां शर्मिंदा महसूस करेंगी. माता पिता शर्मिंदा महसूस करेंगे. पूरा समाज शर्मिंदा महसूस करेंगा. अश्लीलता के इस लेवल तक आप पहुंच गए हैं. उन्होंने कहा कि रणवीर ने जो टिप्पणी की है, उसे अश्लीलता नहीं कहा जाएगा तो किसे कहा जाएगा? आपको लगता है कि आपको ये सब कहने का लाइसेंस मिला हुआ है? आप कोई एक आदमी ऐसा बताए जो इन कमेंट को पंसद करे.

साभार : इंडिया न्यूज़पोर्टल

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।