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सऊदी अरब और पाकिस्तान में हुआ रक्षा समझौता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार को एक अहम रक्षा समझौता किया है। इस समझौते के मुताबिक, दोनों देशों में से किसी एक पर हमला होता है तो ये दूसरे देश पर भी हमला माना जाएगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब की यात्रा की है और वहां प्रिंस सलमान से मुलाकात की है। इसी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। अब पाकिस्तान और सऊदी के बीच इस समझौते को लेकर भारत सरकार का बयान भी सामने आया है।

भारत सरकार ने क्या कहा?

सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- “हमने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर की खबरें देखी हैं। सरकार को पता था कि यह घटनाक्रम, जो दोनों देशों के बीच एक दीर्घकालिक व्यवस्था को औपचारिक रूप देता है, विचाराधीन था। हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर इस घटनाक्रम के प्रभावों का अध्ययन करेंगे। सरकार भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

क्या है समझौते में?

डॉन अखबार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की गई और इसमें कहा गया कि दोनों में से किसी एक देश के खिलाफ किसी भी तरह के आक्रमण को दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।

समझौते के बाद जारी किया गया बयान

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद पाकिस्तान और सऊदी अरब की ओर से एक बयान जारी किया गया है। इसमें बताया गया- ‘‘लगभग आठ दशकों से चली आ रही साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए तथा भाईचारे, इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों के बंधनों पर आधारित दोनों पक्षों ने रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।’’

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।