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मुर्शिदाबाद में महिलाओं को डराया धमकाया गया : सीवी आनंद बोस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

कोलकाता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हिंसा प्रभावित मुर्शिदाबाद जिले का दौरा स्थगित करने के अनुरोध के बावजूद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी वी आनंद बोस शुक्रवार को मालदा पहुंचे. जहां उन्होंने मुर्शिदाबाद हिंसा में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. लोगों से बातचीत कर उनका हाल जाना. लोगों को आश्वासन भी दिया. पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद राज्यपाल ने जिले की कानून व्यवस्था पर कहा कि लोगों को डराया धमकाया गया. बदमाश उनके घरों में घुस आए और उनके साथ मारपीट की गई, अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया. पीड़ितों ने बंगाल की कानून व्यवस्था के मुद्दे को उठाया, खासकर महिलाओं ने. गुंडों और बदमाशों ने लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया. पीड़ित अपने घर वापस जाने से डर रहे हैं. मैं इस मामले को उचित अधिकारियों के पास ले जाउंगा और तुरंत सामान्य स्थिति बहाल होनी चाहिए.

हिंसा को कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता

मालदा पहुंचने से ठीक पहले राज्यपाल ने कहा था कि बंगाल में जगह-जगह हिंसा अपना भयानक रूप दिखा रही है. हमें हिंसा के रास्ते को खत्म होगा और ताबूत में आखिरी कील ठोकनी होगी. यह एक ऐसा काम है जो बंगाल में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए जरूरी है. राज्यपाल ने सीवी आनंद बोस ने कहा कि वहां जो कुछ हुआ है, वह ऐसा कुछ है जो कभी नहीं होना चाहिए था. बंगाल की सड़कों पर कई जगहों पर मौत का नाच चल रहा है. इस तरह की हिंसा को कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. हमें प्रयास करना चाहिए और सभी हितधारकों को एक साथ आना होगा. क्षेत्र का दौरा करने और वहां के लोगों की भावनाओं को साझा करने के बाद मैं निश्चित रूप से इसे मिशन मोड में लेने के लिए एक कार्य योजना बनाऊंगा. किसी भी कीमत पर हिंसा के खिलाफ लड़ना होगा.

राज्यपाल से ठीक पहले पहुंची राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम

राज्यपाल के दौरे से पहले राष्ट्रीय महिला आयोग की एक टीम भी मुर्शिदाबाद दंगों से विस्थापित लोगों से मिलने के लिए मालदा में एक राहत शिविर का दौरा किया. एनएचआरसी की टीम ने मालदा के पार लालपुर हाई स्कूल का दौरा किया, जहां वक्फ (संशोधन) अधिनियम में केंद्र सरकार के संशोधनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान 11 और 12 अप्रैल को मुर्शिदाबाद में सांप्रदायिक झड़पों के बाद से सैकड़ों विस्थापित लोगों ने शरण ली है. एनएचआरसी ने हिंसा का स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि उसने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक टीम को हिंसा प्रभावित इलाके में भेजने का फैसला किया है. यह टीम तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत जांच रिपोर्ट भी सौंपेगी.

हिंसा में तीन लोगों की मौत

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज, सुती, धुलियान और जंगीपुर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में फैली हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई. अपनी जान के डर से कई परिवार मालदा भाग गए और अब अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं. पीड़ितों का कहना है कि उन्हें जान का डर सता रहा है ऐसे में घर परिवार छोड़कर भागने के आलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।