लोड हो रहा है...

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ला सकता है महाभियोग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. संसद भवन में सोमवार सुबह INDIA गठबंधन की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की संभावना पर चर्चा हुई. गठबंधन के नेताओं ने माना कि जरूरत पड़ने पर नियमों के तहत महाभियोग प्रस्ताव लाकर सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि अभी औपचारिक विचार नहीं हुआ है, लेकिन अगर हालात बने तो गठबंधन इस विकल्प को अपनाएगा. महाभियोग प्रस्ताव लाकर संवैधानिक प्रावधानों के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है.

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सोमवार को राज्यसभा की बैठक शुरू होने के पांच मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी.

राहुल गांधी लगातार कर रहे हैं चुनाव आयोग पर हमला

बताते चलें कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को चुनाव आयोग के संवाददाता सम्मेलन के बाद आरोप लगाया कि आयोग पहले छुपकर वोट की चोरी कर रहा था लेकिन अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर यह सरेआम हो रहा है. उन्होंने बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान औरंगाबाद के रमेश चौक पर एक सभा को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि वह न तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से डरते हैं और न ही चुनाव आयोग से डरने वाले हैं.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में कानून में बदलाव करके मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई के दायरे से मुक्त किया गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह नहीं चाहते कि ‘वोट चोरी’ के कारण चुनाव आयोग पर किसी तरह की कार्रवाई हो. इससे पहले, निर्वाचन आयोग ने रविवार को कहा था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य उनमें सभी त्रुटियों को दूर करना है और यह गंभीर चिंता का विषय है कि कुछ दल इसके बारे में गलत सूचना फैला रहे हैं.

- Advertisement -

चिराग पासवान ने राहुल गांधी पर बोला हमला

यह बात समझ से बाहर है कि इस यात्रा से उनका क्या लाभ होगा और प्रदेश को क्या फायदा होगा. यह बात चुनाव आयोग भी कह रहा है और हम लोग भी तय कर रहे हैं की हर नागरिक को वोट दें का अधिकार मिले और देश का जो नागरिक नहीं है मृतक है उसका नाम तो कटना ही चाहिए. यही मांग विपक्ष की भी थी. लोजपा रामविलास के नेता ने कहा कि आप अगर किसी भी संवैधानिक संस्था का विश्वास ही नहीं कीजिएगा तो देश अराजकता में तो नहीं जा सकता. वह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है.

साभार : एनडीटीवी

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

- Advertisement -

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।