लोड हो रहा है...

टेकऑफ के कुछ देर बाद विमान क्रैश होने के कारण मशहूर संगीतकार सहित 12 की मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

वाशिंगटन. सेंट्रल अमेरिका में स्थित देश होंडुरास के तट पर एक विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक मशहूर गरिफुना म्यूजिशियन भी शामिल हैं। लांहसा एयरलाइंस का यह विमान सोमवार रात को रोआटन द्वीप से मुख्यभूमि शहर ला सेइबा के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद समुद्र में क्रैश हो गया। विमान में 17 यात्री और चालक दल के सदस्य थे, जिनमें से पांच को बचा लिया गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के मुताबिक, विमान पूरी ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाया और टक्कर के तुरंत बाद समुद्र में डूब गया। स्थानीय मछुआरों ने जीवित बचे लोगों को बचा लिया। होंडुरास सिविल एरोनॉटिक्स एजेंसी ने कहा कि दुर्घटना की जांच की जा रही है।

औरेलियो मार्टिनेज सुजौ की मौत

मृतक में पूर्व सांसद और गरिफुना जाति समूह के सदस्य औरेलियो मार्टिनेज सुजौ भी शामिल थे, जो अफ्रीकी और आदिवासी मिश्रित वंश से आते थे। मार्टिनेज सुजौ के पास अमेरिकी नागरिकता भी थी। उनके प्रतिनिधि, हेलेन ओडाइल गिवार्च, जो एक फ्रांसीसी नागरिक हैं, दुर्घटना में जीवित बचने वालों में शामिल थीं। मार्टिनेज सुजौ होंडुरास के ग्रासियास ए डियोस क्षेत्र के निवासी थे, जो देश के कैरेबियाई तट के पास स्थित है। उनके भतीजे एंजेल अपारिसियो फर्नांडीज मार्टिनेज, जो अपने चाचा के साथ संगीतकार भी थे, उन्होंने मंगलवार को कहा कि हम तबाह हो गए हैं, वे परिवार का आधार थे।

‘लिता एरीरन’ नाम से संगीत समूह

मार्टिनेज सुजौ पहले “लॉस गाटोस ब्रावोस” के सदस्य थे। इसके बाद उन्होंने अपना खुद का संगीत समूह “लिता एरीरन” बनाया। उनका पहला एल्बम “गरिफुना सोल” उन्हें यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य हिस्सों में लेकर गया। उनके भतीजे ने कहा, “वह गरिफुना संगीत के लिए होंडुरास का सबसे बड़े आदर्श थे और उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया।” सुला घाटी के अफ्रीकी-अवशेष संघ के अध्यक्ष हुम्बर्टो कास्टिलो ने मार्टिनेज सुजौ को “गरिफुना संस्कृति का राजदूत” बताया। उन्होंने कहा कि वे गरिफुना और मिस्किटो दोनों भाषाओं में संगीत रचनाएं करते थे और दोनों भाषाओं में बोलते थे। मृतकों के शवों को रोआटन से सैन पेड्रो सुला के मर्ग में भेज दिया गया।

साभार : इंडिया टीवी

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।