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प्रसिद्ध गायक जुबिन गर्ग सिंगापुर में हादसे के कारण हुई मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

गुवाहाटी. असम के मशहूर गायक और बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके जुबिन गर्ग (52) का सिंगापुर में एक दर्दनाक स्कूबा डाइविंग हादसे में निधन हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुबिन को समुद्र से निकालकर पुलिस ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. आपको बता दें कि वे सिंगापुर नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में शिरकत करने और परफॉर्म करने के लिए पहुंचे थे. आइए एक नजर डालते हैं जुबिन गर्ग की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर.

जुबिन गर्ग की पर्सनल लाइफ

जुबिन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को असम के जोरहाट में हुआ था. वे बचपन से ही संगीत के बेहद शौक़ीन थे. असमिया और बंगाली संगीत जगत में उन्हें एक सुपरस्टार सिंगर और म्यूजिक कंपोजर माना जाता है. उन्होंने 30 से ज्यादा भाषाओं में गाने गाए और अपने अनोखे अंदाज से लोगों का दिल जीत लिया. असमिया सिनेमा में उनका योगदान इतना बड़ा है कि उन्हें अक्सर ‘असम का रॉकस्टार’ कहा जाता है.

बॉलीवुड में बनाया नाम

बॉलीवुड में भी जुबिन गर्ग ने अपनी खास जगह बनाई. साल 2006 की फिल्म ‘गैंगस्टर’ का गाना ‘या अली’ उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इस गाने ने उन्हें देशभर में शोहरत दिलाई. इसके अलावा उन्होंने ‘दिल तू ही बता’ (कृष 3), ‘जाने क्या चाहे मन बावरा’ (प्यार के साइड इफेक्ट्स) और कई अन्य हिट गाने गाए. जुबिन की आवाज में एक अलग खनक और दर्द था, जिसने श्रोताओं को हमेशा मंत्रमुग्ध किया.

समाजसेवा में भी सक्रिय थे जुबीन

संगीत के अलावा जुबिन समाजसेवा में भी सक्रिय थे. वे असम की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने और युवाओं को अपने क्षेत्रीय संगीत से जोड़ने के लिए लगातार काम करते रहे. उनका यूं अचानक चला जाना न सिर्फ असम बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरी क्षति है. जुबिन गर्ग की आवाज और उनका संगीत आने वाली पीढ़ियों तक जिंदा रहेगा.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।