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संदीप सिंह और ऋषभ शेट्टी ने ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ को उनकी 395वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, फरवरी, 2025: जैसा कि भारत छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती मना रहा है, ‘द प्राइड ऑफ भारत: छत्रपति शिवाजी महाराज’ के निर्माताओं ने एक लुभावने पोस्टर का अनावरण किया है, जो महान योद्धा राजा की शक्ति, भक्ति और वीरता को प्रदर्शित करता है। आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक भव्यता से ओत-प्रोत इस आकर्षक दृश्य ने दर्शकों और आलोचकों को आश्चर्यचकित कर दिया है, जो मराठा साम्राज्य के दूरदर्शी नेता को एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है।

छत्रपति शिवाजी महाराज सिर्फ एक योद्धा नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने धर्म और स्वराज्य की अपनी निडर खोज के साथ इतिहास को फिर से परिभाषित किया। उनकी जयंती उनकी बेजोड़ वीरता, उनकी रणनीतिक प्रतिभा और भारत की विरासत पर उनके स्थायी प्रभाव की याद दिलाती है।

इस अवसर का सम्मान करते हुए, ऋषभ शेट्टी ने इस ऐतिहासिक दिन पर कृतज्ञता से अभिभूत होकर कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज की पवित्र जयंती पर, मेरा दिल सम्मान और जिम्मेदारी से भर जाता है। वे सिर्फ एक योद्धा नहीं थे, बल्कि स्वराज्य की आत्मा थे। वे साहस, ज्ञान और भक्ति के प्रतीक थे। स्क्रीन पर उनकी भावना को मूर्त रूप देना एक दिव्य आह्वान है, एक यात्रा जो मुझे शब्दों से परे विनम्र करती है। मुझे उम्मीद है कि मैं उनकी अद्वितीय विरासत के साथ न्याय कर सकूँगा और हर भारतीय को उनकी अमर वीरता की आग का एहसास करा सकूँगा।”

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निर्देशक संदीप सिंह ने इस शुभ दिन पर फिल्म के दूसरे लुक के अनावरण के महत्व पर विचार करते हुए कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती अत्यंत गर्व और चिंतन का क्षण है। यह फिल्म उनकी अदम्य भावना को हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि है, भारत की नियति को नया आकार देने वाले योद्धा को एक सिनेमाई श्रद्धांजलि है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करते हुए उनकी यात्रा को यथासंभव भव्य तरीके से जीवन में लाना है कि उनकी विरासत लाखों लोगों के दिलों को रोशन करती रहे।”

यह भव्य सिनेमाई उदाहरण 21 जनवरी, 2027 को रिलीज़ किया जाएगा, जो यह सुनिश्चित करेगा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत देश के हर कोने और उससे बाहर तक पहुँचे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।