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काश पटेल की एफबीआई के डायरेक्टर के रूप में नियुक्ति को मिली सीनेट की मंजूरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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वॉशिंगटन. भारतीय मूल के अमेरिकी काश पटेल संघीय जांच ब्यूरो ( एफबीआई) के डायरेक्टर बन गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी पटेल की नियुक्ति को गुरुवार को सीनेट की मंजूरी मिल गई है। पटेल की नियुक्ति को व्हाइट हाउस ने डोनाल्ड ट्रंप के बेहतर प्रशासन देने के एजेंडे को क्रियान्वित करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है। काश ने भी पद संभालने के बाद तेवर दिखाते हुए उनको किसी कीमत पर ना छोड़ने की बात कही है, जो अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।

काश पटेल ने अपनी नियुक्ति के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है। एक्स पर एक पोस्ट में पटेल ने कहा, ‘संघीय जांच ब्यूरो का नौवां निदेशक नियुक्त किए जाने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। एफबीआई की लंबी विरासत है, जो देश की सुरक्षा से जुड़ी है। अमेरिकी लोग ऐसी एफबीआई के हकदार हैं, जो जवाबदेह और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध हो। राजनीतिकरण ने जनता के इस एजेंसी में विश्वास कम किया है। मैं साफ करना चाहता हूं कि एफबीआई अब उनको छोड़ेगी नहीं, जो अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाएंगे। हम ऐसे लोगों को ढूंढ़कर न्याय के कटघरे में लाएंगे।’

गुजरात से काश का नारा

कश पटेल का जन्म 25 फरवरी, 1980 को न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में गुजराती माता-पिता के घर हुआ था। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ रिचमंड से ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वह पेस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ गए, जहां से उन्होंने ज्यूरिस डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद पटेल ने एक वकील के रूप में अपना करियर शुरू किया। सरकारी वकील के तौर पर कई वर्षों तक काश ने कामयाबी के साथ काम किया है। 45 वर्षीय भारतीय मूल के पटेल ने वकील के तौर पर कई हाईप्रोफाइल पदों पर कार्य किया है। इनमें राष्ट्रपति के उपसहायक और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में वरिष्ठ निदेशक का पद शामिल हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि पटेल ISIS और अल-कायदा के अल-बगदादी और कासिम अल-रिमी को खत्म करने और अमेरिकी बंधकों की सुरक्षित वापसी के मिशनों से भी जुड़े थे।

काश का परिवार कैसे पहुंचा अमेरिका

अमेरिका में जन्मे और पले-बढ़े पटेल अक्सर अपनी भारतीय विरासत के बारे में बात करते रहे हैं। काश पटेल के माता-पिता भारत से युगांडा फिर कनाडा और फिर अमेरिका पहुंचे थे। काश पटेल के माता-पिता युगांडा के शासक ईदी अमीन के देश छोड़ने के फरमान के बाद 1970 के दशक में कनाडा के रास्ते अमेरिका पहुंचे थे। 1988 में पटेल के पिता को अमेरिका की नागरिकता मिली थी और इसके बाद उन्होंने एरोप्लेन कंपनी में नौकरी शुरू की थी।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।