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इंदिरा गांधी के हत्यारे के भतीजे को ड्रग्स रखने के आरोप में 22 साल की सजा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ऑकलैंड. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह के भतीजे बलतेज सिंह को न्यूजीलैंड में एक बड़े ड्रग मामले में दोषी ठहराया गया है.  ऑकलैंड हाई कोर्ट ने शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को 700 किलोग्राम मेथाम्फेटामाइन नामक सिंथेटिक ड्रग रखने के जुर्म में बलतेज सिंह को 22 साल जेल की सजा सुनाई है. ऑकलैंड पुलिस ने साल 2023 में बलतेज सिंह को एक छोटे गोदाम में छापा मारकर गिरफ्तार किया था, जहां उन्हें बीयर के कई कैन मिले थे, जिनमें कथित तौर पर मेथम्फेटामाइन मिला हुआ था.

मेथ आयात नेटवर्क का मास्टरमाइंड

ऑकलैंड पुलिस ने 21 वर्षीय आइडेल सगला की मौत के बाद इस जगह पर छापा मारा था. यह बताया जा रहा है कि उसे बीयर के रूप में मेथ देकर मार दिया गया था. इस हत्या के मामले में हिमतजीत सिंह को दोषी ठहराया गया था. उसने कोर्ट में दावा किया कि उसका बिजनसमैन दोस्त बलतेज ने उसे धोखा दिया था. उसने बताया कि बलतेज मेथ के आयात में संलिप्त था.

कोर्ट ने सुनाई 22 साल जेल की सजा

न्यूजीलैंड के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर दोषी की पहचान का खुलासा नहीं किया है, लेकिन सूत्रों ने पुष्टि की है कि 22 साल की जेल की सजा पाने वाले व्यक्ति का नाम बलतेज सिंह है. सागाला की मौत के सिलसिले में उस पर कोई आरोप नहीं लगाया गया था, लेकिन जब तक वह कम से कम दस साल की सजा नहीं काट लेता, तब तक उसे पैरोल नहीं मिल सकती.

बलतेज, सरवन सिंह अगवान के पुत्र हैं, जो सतवंत सिंह के भाई हैं. सतवंत सिंह उन सिख अंगरक्षकों में से एक था, जिन्होंने 31 अक्टूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके आवास पर हत्या कर दी थी. बलतेज का परिवार 1980 के दशक में न्यूजीलैंड चला गया था और ऑकलैंड में एक छोटी सी किराने की दुकान खोली थी. वह आखिरी बार दिसंबर 2019 में भारत आए थे, और करीब ढाई महीने तक रहे थे.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।