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भारी बारिश के कारण बेंगलुरु में 5 की मौत, 500 घर डूबे

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बेंगलुरु. कर्नाटक की राजधानी और हाईटेक सिटी बेंगलुरु में बारिश ने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है। पिछले 40 घंटों से हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित रहा और जलमग्न सड़कों के बीच कई जगह यातायात बाधित हो गया। बेंगलुरु में मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। 500 घरों में पानी भर गया है और 20 से ज्यादा झीलें उफान पर है। अंडरपास और फ्लाईओवरों पर पानी भर गया है।

भारी बारिश के कारण शहर के साई लेआउट में एक द्वीप जैसी स्थिति बन गई और यहां घरों की निचली मंजिलें आधी डूब गई हैं, जिसके कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। भारी बारिश के कारण शहर के हेनूर स्थित एक अनाथालय में भी पानी भर गया। मान्यता टेक पार्क और सिल्क बोर्ड जंक्शन जैसे कई इलाकों के जलमग्न हो जाने के कारण वहां आवागमन में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

जलभराव के कारण सड़कों पर कई वाहन फंस गए, जिससे शहर के कई हिस्सों में यातायात बाधित रहा। सोमवार को बारिश के कारण बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी की दीवार गिरने से 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई थी। कंपनियों को भी वर्क फ्रॉम होम देने की सलाह दी गई है। पहली ही बारिश ने बेंगलुरु में आम जनजीवन को काफी अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर में अभी और बारिश के आसार हैं। बारिश ने शहर में भयंकर तबाही मचा दी है। मंदिर, पार्क, सड़कें सब जलमग्न हो गए हैं।

बेंगलुरु में भारी बारिश की वजह से विभिन्न इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, सड़कों पर जगह जगह पानी भर गया है और कई आवासीय इलाके जलमग्न हो गए हैं।आईएमडी के बयान के अनुसार, बागलकोट, बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण, बेलगाम, चिक्कबल्लापुर, धारवाड़, गडग, ​​कोलार, कोप्पल, विजयनगर जिले आज बारिश से प्रभावित रहेंगे।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।