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जिलाधिकारी मेधा रूपम ने डीएक्टिवेट किये अपने सोशल मीडिया अकाउंट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश स्थित गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रुपम ने सोशल मीडिया साइट्स- फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट डिएक्टिवेट कर लिए हैं. जानकारी के अनुसार मेधा रूपम ने यह फैसला गत सप्ताह से हो रही ट्रोलिंग की वजह से लिया है. सोशल मीडिया पर मेधा रुपम उस वक्त लोगों के निशाने पर आ गईं जब उनके पिता और भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समेत अन्य विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों पर एक प्रेस वार्ता की.

ज्ञानेश कुमार की प्रेस वार्ता के बाद सोशल मीडिया पर उनकी बेटी और भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी IAS मेधा रुपम के साथ-साथ दामाद एवं सहारनपुर के जिलाधिकारी मनीष बंसल को भी ट्रोल किया जाने लगा. सोशल मीडिया पर लोगों ने यहां तक लिखा कि आखिर किस आधार पर मेधा रुपम को नोएडा में दो बार पोस्टिंग मिली. बता दें गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी नियुक्त होने से पहले मेधा रुपम, वर्ष 2023-2024 तक ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में बतौर एसीईओ अपनी सेवाएं दे चुकीं थीं.

किस जिले के डीएम हैं मेधा रुपम के पति?

वर्ष 2014 बैच की आईएएस अधिकारी मेधा रुपम को उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 जुलाई 2025 को गौतमबुद्ध नगर का जिलाधिकारी नियुक्त किया था. वहीं उनके पति मनीष बंसल की बात करें तो इसी साल जून 25 जून को मनीष बंसल को सहारनपुर का जिलाधिकारी नियुक्त किया था. उधर, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से परेशान अकाउंट्स डिएक्टिवेट करने के बाद मेधा रुपम ने कहा कि अभी तक शिकायत नहीं की है. हिन्दी अखबार हिन्दुस्तान के अनुसार रुपम ने कहा कि लेकिन भविष्य में निश्चित तौर पर शिकायत करा के कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।