लोड हो रहा है...

तुर्किये में आया 6.2 तीव्रता का भूकंप, 1 घंटे में महसूस किये गए 3 बड़े झटके

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्तांबुल. तुर्किये के इस्तांबुल में आज 6.2 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया। इसका केंद्र इस्तांबुल के पास मरमारा सागर में था। तुर्किये की इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी ने बुधवार को बताया कि भूकंप से अभी तक किसी तरह के नुकसान या चोट की कोई खबर नहीं है। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने भी भूकंप की पुष्टि की है और कहा है कि भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था। भूंकप से शहर और आसपास के इलाकों में बड़े झटके महसूस किए गए। लोकल मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक भूकंप का सेंटर सिलिवरी के नजदीक था, जो तटीय क्षेत्र है और भूकंपीय एक्टिविटी के लिए जाना जाता है।

इस इलाके में तीन अभी तक भूकंप के तीन झटके आ चुके हैं…

पहला भूकंप 3.9 तीव्रता का था और स्थानीय समयानुसार 12:13 बजे सिलिवरी जिले के तट पर आया। दूसरा भूकंप 6.2 तीव्रता का था और स्थानीय समयानुसार 12:49 बजे उसी इलाके में आया। तीसरा 4.4 तीव्रता का भूकंप स्थानीय समयानुसार 12:51 बजे इस्तांबुल के बुयुकचेकमेस जिले में आया। लोग बोले- तुर्किये में रहना मतलब भूकंप के साथ जीना लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्तांबुल के इस इलाके में बीते 6 सालों में भूकंप के इतने शक्तिशाली झटके महसूस नहीं किए गए। लोगों का कहना है कि अचानक इमारतें हिलने लगीं, इसके बाद लोग घर छोड़कर बाहर की तरफ भाग निकले। तुर्किये में रहने का मतलब है भूकंप के साथ जीना।

दो साल पहले भूकंप से 20 हजार लोगों की जान गई थी दो साल पहले तुर्किये और सीरिया में आए भूकंप से 22,765 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 75 हजार से ज्यादा घायल हुए थे। तुर्किये में 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई थी, जबकि 35 हजार से ज्यादा लोगों के घायल हुए थे।

साभार : दैनिक भास्कर

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।