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आईएनएस तमाल ने ग्रीस की सौडा खाड़ी में बंदरगाह पर अपनी यात्रा पूरी की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भारतीय नौसेना का आधुनिकतम और उन्नत तकनीकों से लैस युद्धपोत आईएनएस तमाल भारत में अपने घरेलू बंदरगाह के लिए आने के मार्ग में 19-22 अगस्त, 2025 को ग्रीस के सौडा खाड़ी में रुका। बंदरगाह पर आगमन के दौरान भारतीय जहाज के चालक दल ने हेलेनिक नौसेना और नाटो अधिकारियों के साथ बातचीत की। इसमें 19 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी नौसेना बेस पर कमांडर कमोडोर डायोनिसियोस मंतादाकिस, नाटो समुद्री अवरोधन परिचालन प्रशिक्षण केंद्र (एनएमआईओटीसी) के प्रमुख कैप्टन कोप्लाकिस इलियास और अमरीकी नौसेना के नौसेना सहायता गतिविधि के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन स्टीफन स्टीसी से कमांडिंग ऑफिसर की मुलाकात भी शामिल थी। बैठकों के दौरान चर्चा परिचालन संबंधी मामलों और समुद्री सहयोग पर केंद्रित रही। आईएनएस तमाल के चालक दल के लिए सौडा खाड़ी में इतालवी नौसेना के लैंडिंग हेलीकॉप्टर डॉक, बहु-भूमिका वाले हमले की इकाई आईटीएस ट्राइस्टे पर एक क्रॉस डेक दौरा आयोजित किया गया।

ग्रीस में भारत के राजदूत रुद्रेन्द्र टंडन ने 20 अगस्त, 2025 को जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ बातचीत की। चालक दल ने युद्धपोत के बंदरगाह प्रवास के दौरान, सौडा नौसेना बेस और आयुध सुविधा, एनएमआईओटीसी और स्थानीय समुद्री संग्रहालय का दौरा किया। जहाज के चालक दल ने क्रेते में द्वितीय विश्व युद्ध के कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की।

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आईएनएस तमाल 22 अगस्त, 2025 को सौडा खाड़ी से रवाना हुआ और उसने हेलेनिक नौसेना की रूसेन श्रेणी की गश्ती नौका एचएस रिटोस के साथ एक अभ्यास में भाग लिया, जिसका उद्देश्य नौसेनाओं के बीच आपसी सहभागिता को बढ़ावा देना था।

आईएनएस तमाल का बंदरगाह पर आगमन भारत द्वारा ग्रीस के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को सशक्त करने के प्रयासों को दर्शाता है। इसने दोनों नौसेनाओं को सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने और संयुक्त सहयोग के लिए आगे के अवसरों का लाभ उठाने का अवसर भी प्रदान किया है।

भारत में अपने घरेलू बंदरगाह पहुंचने के रास्ते में यह युद्धपोत एशिया के मित्र देशों के बंदरगाहों का दौरा करेगा, जिससे समुद्री कूटनीति को बढ़ावा मिलेगा और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार होगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।