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मुख्तार अंसारी के बेटे उमर की बदली गई जेल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की गाजीपुर जेल माफिया मुख्तार अंसारी के छोटे उमर अंसारी में बंद हैं. हालांकि अब उनकी जेल बदल दी गई है. शनिवार सुबह उमर अंसारी को कासगंज जेल में शिफ्ट कर दिया गया है. इस बदलाव के पीछे की वजह पुलिस ने सुरक्षा कारणों को बताया है. उमर फर्जी दस्तावेज मामले में जेल में बंद हैं. उमर को 4 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था तभी से वो जेल में बंद हैं.

उमर अंसारी को कोर्ट में नकली दस्तावेज पेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर किया गया था. यह मामला उनके पिता मुख्तार अंसारी की जब्त की गई संपत्तियों को छुड़ाने के लिए दायर एक याचिका से जुड़ा हुआ है. उमर को शनिवार सुबह कासगंज जेल शिफ्ट कर दिया गया है. कासगंज जेल में ही उमर के भाई अब्बास अंसारी भी बंद हैं. अब्बास अंसारी पर साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था. स मामले में उन्हें दोषी करार देते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट ने 31 मई को 2 साल की सजा सुनाई थी. साथ ही 3 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था. हालांकि हाल ही में हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दी है.

किस मामले में जेल में बंद है उमर?

दरअसल गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे उमर अपने पिता की संपत्तियों के मामले में ही जेल में बंद हैं. उमर पर आरोप है कि उन्होंने अपनी मां अफशां अंसारी के नकली साइन करके जब्त की गई संपत्ति के फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं. इसी मामले में उनपर मोहम्मदाबाद थाने में मामला दर्ज किया गया था. उमर की मां और मुख्तार अंसारी की पत्नी पर भी पुलिस ने 50 हजार का इनाम घोषित किया था, जो लंबे समय से फरार चल रही हैं. अफशां खान पर करीब 13 मामले दर्ज हैं.

हार्ट अटैक से हुई थी मुख्तार अंसारी मौत

गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की आज से लगभग 3 साल पहले बांदा जेल में हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई थी. इस मौत को लेकर उस समय कई तरह के आरोप भी लगाए गए थे. परिवार ने अंसारी की मौत को साजिश बताया था, इसके साथ ही इसमें किसी और के शामिल होने का आरोप भी लगाया था. हालांकि इस पूरे मामले में जेल अधिकारियों की तरफ से कहा गया था कि मुख्तार को मौत से करीब 3 घंटे पहले ही इलाज के लिए मंडलीय कारागार से मेडिकल कॉलेज लाया गया था. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।