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कॉमेडियन कुणाल कामरा ने पेश होने के लिए मांगा एक हफ्ते का समय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) पर बिना नाम लिए टिप्पणी कर विवादों में घिरे कॉमेडियन कुणाल कामरा ने पुलिस पुलिस से पेश होने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है. कामरा की टिप्पणी को लेकर महाराष्ट्र में उनका जोरदार विरोध हो रहा है. सरकार और पुलिस प्रशासन ने भी उनपर नकेल कसी है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम लिए बिना की गई विवादित टिप्पणी को लेकर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को मुंबई की खार पुलिस ने समन भेजा है. पुलिस ने कामरा को मामले की जांच के लिए उपस्थित होने के लिए समन भेजा है.

खार पुलिस को चिट्ठी भेजकर कामरा ने मांगा एक हफ्ते का समय

मुंबई की खार पुलिस के समन पर कुणाल कामरा ने पेश होने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा है. इससे पहले कॉमेडियन कुणाल कामरा ने विवाद के बीच कहा कि वो माफी नहीं मांगेगे. वो भीड़ से नहीं डरते हैं. कामरा ने वही कहा जो अजित पवार ने एकनाथ शिंदे के बारे में कहा था.

कामरा पहले बोल चुके- मुझे मेरे बयान पर कोई खेद नहीं

कुणाल ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एख्स पर अपना स्टेटमेंट जारी किया. सूत्रों के मुताबिक मुंबई पुलिस ने कुणाल कामरा से संपर्क किया है. फोन पर पुलिस और कामरा के बीच शुरुआती पूछताछ हुई है. बताया जा रहा है कि कुणाल ने कहा कि उन्होंने अपने होश-ओ-हवास में बयान दिया है और कोई खेद नहीं है.

शिवसेना नेता बोले- कामरा की मस्ती शिवसैनिक उतारेंगे

मंगलवार को शिवसेना नेता संजय गायकवाड़ ने कहा कि कुणाल कामरा को मस्ती चढ़ी है. उनकी मस्ती हमारे महाराष्ट्र के सैनिक उतारेंगे. उन्हें बहुत मस्ती चढ़ी है, उनकी मस्ती हमारे महाराष्ट्र के सैनिक उतारेंगे. शिवसेना नेता ने कहा कि कुणाल कामरा पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं. कॉमेडी शो के माध्यम से वह लोगों का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं. उनके खिलाफ निश्चित रूप से कानूनी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन हमारी सेना अपने तरीके से जवाब देगी.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।