लोड हो रहा है...

पाकिस्तान मौसम विभाग ने बलूचिस्तान में सूखे की जारी की चेतावनी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

क्वेटा. पाकिस्तान पहले से ही कर्ज, महंगाई और भूखमरी से जुझ रहा है, इसी बीच पाकिस्तानी मौसम विभाग ने ऐसी चेतावनी दे दी जिससे पाक आवाम की हालत और भी खराब हो गई है.  पीएमडी ने बताया कि फरवरी और मार्च में कम बारिश की संभावना जताई है और कहा है कि इस दौरान सूखा भी झेलना पड़ेगा. पाकिस्तान की समा वेबसाइट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान मौसम विभाग (पीएमडी) ने सिंध, बलूचिस्तान और पंजाब के लिए सूखे की चेतावनी जारी की है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि बारिश में भारी कमी और बढ़ते तापमान के कारण स्थिति और खराब हो सकती है.

देश में 40% कम बारिश

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2024 और 21 मार्च, 2025 के बीच देश में सामान्य से 40% कम बारिश हुई. सिंध में सबसे अधिक 62% की कमी दर्ज की गई, उसके बाद बलूचिस्तान में 52%, पंजाब में 38%, खैबर पख्तूनख्वा में 35% और आज़ाद जम्मू और कश्मीर में 29% की कमी दर्ज की गई. पीएमडी ने कहा कि हाल ही में हुई बारिश ने मध्य और ऊपरी क्षेत्रों में स्थिति में सुधार किया है, लेकिन दक्षिणी सिंध, बलूचिस्तान के कुछ हिस्सों और पंजाब के निचले पूर्वी मैदानी इलाकों में सूखे की स्थिति बनी हुई है. असामान्य रूप से उच्च तापमान के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है, मार्च 2025 में देश के निचले आधे हिस्से में तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. पीएमडी ने कहा है तरबेला और मंगला बांधों में पानी की गंभीर कमी है.  उन्होंने कहा कि तरबेला और मंगला में इस समय जल स्तर 1,402 फीट और 1,061.75 फीट है. दोनों ही खत्म होने के स्तर पर हैं. प्रमुख नदियों में पानी का प्रवाह भी गंभीर रूप से कम हो गया है.

सूखे की स्थिति बिगड़ती जा रही है

पीएमडी के राष्ट्रीय सूखा निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी केंद्र (एनडीएमसी) ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में सूखे की स्थिति और भी गंभीर होने की उम्मीद है, खासकर सिंध, बलूचिस्तान और पंजाब में. दक्षिणी पाकिस्तान के कई हिस्सों में लगातार सूखे के दिन 200 से अधिक हो गए हैं, जिससे मिट्टी की नमी काफी कम हो गई है और पानी की मांग बढ़ गई है. सिंध में, पद्दीन, शहीद बेनजीराबाद, दादू, थारपारकर, उमरकोट, खैरपुर, हैदराबाद, थट्टा, बदीन और कराची में मध्यम सूखे की स्थिति की उम्मीद है, जबकि घोटकी, जैकोबाबाद, लरकाना, सुक्कुर और संघर में हल्के सूखे की संभावना है.

किस इलाके में भयंकर तबाही?

बलूचिस्तान के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में ग्वादर, केच, लासबेला, पंजगुर और अवारन शामिल हैं, जहां मध्यम सूखे की स्थिति बनी हुई है. चगई, जाफराबाद, झाल मग्सी, सिबी, नुश्की और वाशुक सहित अन्य प्रभावित जिलों में भी स्थिति बिगड़ रही है. पंजाब में, बहावलनगर, बहावलपुर और रहीम यार खान में हल्के से मध्यम सूखे की स्थिति का सामना करने की उम्मीद है. अचानक सूखे की स्थिति उभरना पीएमडी ने अचानक सूखे की स्थिति उभरने की भी चेतावनी दी है.

- Advertisement -

साभार : जी न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।