लोड हो रहा है...

जर्मनी में एक महिला ने 13 लोगों को चाकू मार गिया घायल, 6 गंभीर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बर्लिन. एक ओर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी में पाक‍िस्‍तान का आतंकी चेहरा बेनकाब कर रहे थे, उसके चंद घंटों बाद ही जर्मनी के दूसरे सबसे बड़े शहर हैम्बर्ग से सनसनीखेज खबर आई. वहां हैम्बर्ग सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक महिला ने चाकू से हमला कर 13 लोगों को घायल कर दिया. घटना प्लेटफॉर्म 13 और 14 के बीच हुई, जब स्टेशन यात्रियों से खचाखच भरा था. जर्मन पुलिस के मुताबिक, घायलों में छः की हालत गंभीर है और कुछ को तुरंत सर्जिकल यूनिट में भर्ती कराया गया है. हमलावर महिला को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया है. इस घटना ने उस वक्त दुनिया का ध्यान खींचा, जब जयशंकर जर्मनी के ही एक मंच पर पाकिस्तान को घेरते हुए कह रहे थे, “आतंकवाद को पालना छोड़िए, तभी दुनिया आपको गंभीरता से लेगी. जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत अब आतंक के मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगा.

पहले भी हुई ऐसी वारदात

यह पहली बार नहीं है कि हैम्बर्ग रेलवे स्टेशन हिंसा का गवाह बना हो. 2018 में भी एक युवक ने स्टेशन पर अपनी पत्नी और मासूम बेटी की चाकू से हत्या कर दी थी. शुक्रवार को हुए हमले में आतंकी एंगल है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है. घटना के बाद स्टेशन पर भारी पुलिसबल तैनात किया गया और प्लेटफॉर्म अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. जर्मन मीडिया में हमलावर की पहचान उजागर नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे ‘हेट अटैक’ कहा जा रहा है.

सवाल उठ रहे हैं

क्या जर्मनी जैसे विकसित देश में भी अब पब्लिक स्पेस सुरक्षित नहीं रहे? क्या यूरोप में बढ़ती कट्टरता या मानसिक तनाव इस तरह की घटनाओं की वजह बन रहा है? और सबसे अहम क्या ऐसे हमलों में ‘कॉपीकैट’ टेंडेंसी देखी जा रही है?

साभार : न्यूज18

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।