लोड हो रहा है...

सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी पर लगा लाभ के पद पर काम करने का आरोप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर यह पता लगाने की मांग की है कि क्या समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी द्वारा दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत संसद मार्ग स्थित जामा मस्जिद के इमाम का पद लाभ के पद के दायरे में आता है या नहीं. साथ ही इमाम पद से हटाने की भी गुजारिश की गई है. जमाल सिद्दीकी ने स्पीकर ओम बिरला को भेजे पत्र में कहा, “मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के लोकसभा सांसद हैं. साथ ही वह संसद मार्ग स्थित दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत आने वाले नई दिल्ली जामा मस्जिद के इमाम भी हैं. इमाम होने के नाते वह हर महीने 18 हजार रुपये सैलरी के रूप में भी ले रहे हैं.”

CM रेखा गुप्ता को भी लिखा पत्र

उन्होंने आगे कहा, “मेरी जानकारी के अनुसार, यह पद संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (ए) के तहत लाभ का पद माना जा सकता है क्योंकि यह दिल्ली सरकार के अधीन एक वैधानिक निकाय द्वारा वित्तपोषित है. और यह संसद (अयोग्यता निवारण) अधिनियम 1959 के तहत छूट नहीं मिलती है. ऐसे में किसी सांसद की ओर से ऐसा पद धारण करने की सूरत में यह अयोग्यता का आधार बनता है.” बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी भेजे अपने पत्र के जरिए संसद मार्ग स्थित जामा मस्जिद के इमाम पद से मोहिबुल्लाह नदवी को हटाने की भी मांग की है. सिद्दीकी ने यह भी आरोप लगाया कि मोहिबुल्लाह नदवी ने अपनी पार्टी के काम के लिए मस्जिद परिसर का दुरुपयोग किया है.

किसी दूसरे को इमाम बनाया जाएः सिद्दीकी

जमाल सिद्दीकी का कहना है कि पार्लियामेंट मस्जिद वक्फ बोर्ड के अधीन आती है और मोहिबुल्लाह नदवी की गतिविधि समाजवादी पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा कि नदवी की गतिविधियां पहले से ही समाजवादी पार्टी को लाभ पहुंचाने वाली थीं. मस्जिद के इमाम के नाते मस्जिद से इस्लाम धर्म का काम करना था, लेकिन वह समाजवादी पार्टी का प्रचार-प्रसार मस्जिद से खुले आम करते थे. उनका कहना है कि मुलिबुल्लाह नदवी को तत्काल प्रभाव से हटाकर किसी अच्छे व्यक्ति को दिल्ली वक्फ बोर्ड के तरफ से पार्लियामेंट मस्जिद में इमाम नियुक्त किया जाए.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।