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पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है. धमकी की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और बम स्क्वॉड (एटीएस) को बुलाया गया है. पीरबहोर थाने की पुलिस के साथ बड़े अधिकारी भी सिविल कोर्ट पहुंचे हैं. मामले की छानबीन शुरू कर दी गई है. ईमेल भेजकर यह धमकी दी गई है. शुक्रवार (25 अप्रैल) को जैसे ही यह जानकारी सामने आई तो सिविल कोर्ट में हड़कंप मच गया. इस पूरे मामले में पटना सेंट्रल एसपी स्वीटी शेहरावत ने पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि ईमेल से थ्रेट रिसीव हुआ है, जिसमें पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की बात लिखी गई थी. इसको देखते हुए सुरक्षा के ख्याल से जांच की जा रही है.

सिविल कोर्ट के तीनों गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात

बताया जाता है कि बम से उड़ाने की धमकी के बाद पटना सिविल कोर्ट के तीनों गेट पर सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है. पटना सिविल कोर्ट को बंद कर दिया गया है. लोगों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है. जैसे ही बम से उड़ाने की धमकी की सूचना कोर्ट परिसर में फैली तो लोगों को धीरे-धीरे निकाला जाने लगा.

गाड़ियों की जांच… लोगों की ली गई तलाशी

इस पूरे मामले में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली. पटना सिविल कोर्ट आने-जाने वाली गाड़ियों की जांच की गई है. पुलिसकर्मी लोगों की तलाशी लेते दिखे. इतना ही नहीं वकीलों की भी बारीकी से जांच की गई है. मेटल डिटेक्टर से भी जांच की जा रही है. बता दें पटना सिविल कोर्ट पीरबहोर थाना क्षेत्र में आता है. इससे पहले पिछले साल (2024) जनवरी में पटना हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. हालांकि कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिला था. इस बार सिविल कोर्ट को धमकी मिली है. अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कुछ निकलकर सामने आता है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।