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भारत से विवाद के कारण अब पाकिस्तान सुपर लीग को नहीं मिलेंगे दर्शक

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. पहलगाम में आतंकी हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खियां काफी ज्यादा बढ़ गई है. भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े कदम उठाए हैं और इसके बाद से दोनों मुल्कों के बीच क्रिकेट के संबंध भी खटाई में पड़ते दिख रहे हैं. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी डरा हुआ है क्योंकि उसकी टी20 लीग पीएसएल पर अब एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है. दरअसल एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सुपर लीग के ब्रॉडकास्ट के लिए पाकिस्तान गए हुए कई भारतीय प्रोफेशनल्स वतन वापसी कर रहे हैं. इसका नुकसान सीधे पीसीबी को होने वाला है, आइए बताते हैं कैसे?

पाकिस्तान से लौट रहे हैं भारतीय, अब पीएसएल का होगा सत्यानाश!

पाकिस्तान की सरकार ने पीएसएल ब्रॉडकास्ट से जुड़े भारतीय क्रू मेंबर्स को वापस इंडिया भेजना शुरू कर दिया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इससे काफी ज्यादा डरा हुआ है क्योंकि भारतीय ब्रॉडकास्टर्स की वजह से पाकिस्तान सुपर लीग को काफी ज्यादा दर्शक मिल रहे थे लेकिन अब उनके ना होने से इस लीग को नुकसान होगा. पाकिस्तान के क्रू मेंबर्स भारतीयों जैसे प्रोफेशनल नहीं हैं जिससे पीएसएल की ब्रॉडकास्ट क्वालिटी गिरनी तय है.

फैनकोड ने लगाया पीएसएल पर बैन

स्पोर्ट्स की लाइव स्ट्रीमिंग करने वाली फैनकोड ऐप ने भी पीएसएल से अपना हाथ वापस खींच लिया है. पीएसएल की लाइव स्ट्रीमिंग फैन कोड पर हो रही थी लेकिन पुलवामा हमले के बाद इस टीम ने इस टूर्नामेंट से हाथ खींच लिए हैं. पाकिस्तान सुपर लीग को वैसे ही कम व्यूअर्स मिल रहे थे और अब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उसके ऊपर और बड़ी मुसीबत आ खड़ी हुई है. बता दें पहलगाम में 22 अप्रैल को एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे, जिसमें 28 लोगों की जान चली गई.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।