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मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश को अमेरिका के हाथों बेच दिया है : शेख हसीना

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

ढाका. बांग्लादेश में सियासी उथल-पुथल के बीच देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यूनुस ने आतंकवादियों की मदद से बांग्लादेश की सत्ता हथियाई है और इसमें से कई आतंकी संगठन ऐसे हैं जिन पर अंतरराष्ट्रीय बैन लगा हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि यूनुस ने सत्ता हथियाने के लिए प्रतिबंधित लोगों की मदद ली, जिनसे अब तक हमने बांग्लादेश के लोगों की रक्षा की थी. उन्होंने कहा, “सिर्फ एक आतंकवादी हमले के बाद हमने सख्त कदम उठाए. कई लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन अब बांग्लादेश की जेलें खाली हैं. यूनुस ने ऐसे सभी लोगों को रिहा कर दिया और अब बांग्लादेश में उन आतंकवादियों का ही राज है.”

शेख हसीना ने यूनुस पर लगाए गंभीर आरोप

शेख हसीना ने आगे कहा, “हमारे महान बंगाली राष्ट्र का संविधान जिसे हमने लंबे संघर्ष और मुक्ति संग्राम से हासिल किया है, इस उग्रवादी नेता को, जिसने अवैध रूप से सत्ता पर कब्जा किया है, संविधान को छूने का अधिकार किसने दिया?” पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि यूनुस का मुख्य सलाहकार के पद पर रहने का भी कोई आधार नहीं है और वह अस्तित्व में नहीं है. शेख हसीना ने आरोप लगाया कि यूनुस ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है.

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार को हटाने की तैयारी

बता दें कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार को हटाने की तैयारी हो रही है. सेना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने दिसंबर तक चुनाव कराने की मांग की है. इस पर अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस का कहना है कि अगर उन पर चुनाव कराने या किसी मुद्दे पर बेवजह दबाव बनाया गया तो वह जनता के साथ मिलकर जवाबी कार्रवाई करेंगे.

5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में हुआ तख्तापलट

शेख हसीना के बांग्लादेश की सत्ता छोड़ने के बाद से वहां अस्थिरता बनी हुई है. देश में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ हिंसक बगावत हुई थी, जिसके बाद उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ी. 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट हुआ, जिसके बाद से शेख हसीना भारत में है.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।