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पश्चिम बंगाल फिर से सुरक्षित, शांत, समृद्ध और सुजलाम-सुफलाम होगा : अमित शाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा पंडाल और पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र दुर्गा पूजा पंडाल  का उद्घाटन किया। गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कोलकाता स्थित कालीघाट मंदिर में माँ काली की पूजा अर्चना भी की।

 

संतोष मित्रा स्क्वायर दुर्गा पूजा पंडाल उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नवरात्रि में नौ दिन का पूजा महोत्सव केवल बंगाल या भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में बहुत प्रसिद्ध हो चुका है। उन्होंने कहा कि बंगाल की इस महान परंपरा को पूरे विश्व ने बहुत आनंद के साथ देखा और स्वीकारा है। नौ दिन तक पूरे बंगाल में हर व्यक्ति चाहे वह बच्चा हो युवा हो या वृद्ध, सभी लोग शक्ति पूजा में अपने आप को समर्पित करते हैं। श्री शाह ने कहा कि ये नौ दिन बंगाल के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

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केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने बंगाल के विकास के माध्यम से विकसित भारत का जो स्वप्न देखा है, हम सब मिलकर उसे सिद्ध करें। श्री शाह ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में माँ दुर्गा के आशीर्वाद से बंगाल में ‘सोनार बांग्ला’ का निर्माण करने वाली सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि बंगाल फिर से सुरक्षित, समृद्ध, शांत, सुजलाम, सुफलाम बनेगा और कवि-गुरु रवींद्र नाथ टैगोर जी की कल्पना के बंगाल का निर्माण होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कोलकाता में हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण 10 से ज्यादा लोगों की मृत्यु पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हम उन सभी पीड़ित परिवारों के दुख में सहभागी हैं।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने महान शिक्षाविद और समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी की जयंती पर उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि वंदनीय ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी ने गुलामी के दिनों में न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश में शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया, उसे कोई भुला नहीं सकता। श्री शाह ने कहा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी ने बांग्ला भाषा, संस्कृति, व्याकरण और महिलाओं की शिक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।