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दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर चुने गए मोहन सिंह बिष्ट

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता मोहन सिंह बिष्ट को दिल्ली विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुना गया है. मुस्तफाबाद से विधायक बिष्ट के नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रखा, जिसका मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने समर्थन किया. बहुमत के साथ मोहन सिंह बिष्ट डिप्टी स्पीकर चुने गए हैं. मोहन सिंह बिष्ट छह बार के विधायक हैं. इस बार पार्टी ने उन्हें मुस्तफाबाद सीट से उतारा और उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के आदिल अहमद खान को 17 हजार से अधिक वोट से हराया था.

पांच बार करावल नगर सीट से चुने गए बिष्ट

इससे पहले वो करावल नगर से जीत दर्ज कर रहे थे. वह इस सीट से पहली बार 1998 में जीते थे और 2015 तक इस सीट से विधायक रहे. बिष्ट 2020 में फिर से करावल नगर सीट से जीते. 2015 के चुनाव में उन्हें कपिल मिश्रा के हाथों हार मिली थी. तब मिश्रा आप के टिकट पर चुनाव लड़े थे. बाद में वो बीजेपी में शामिल हो गए. पार्टी ने इसबार कपिल मिश्रा को करावल नगर से उम्मीदवार बनाया. उन्होंने यहां बड़े अंतर से जीत दर्ज की और रेखा गुप्ता की सरकार में मंत्री बने हैं. बीजेपी ने बिष्ट को मुस्तफाबाद से उम्मीदवार बनाया और वो जीते.

क्या होता है डिप्टी स्पीकर का काम?

दिल्ली विधानसभा में वरिष्ठ नेता विजेंद्र गुप्ता स्पीकर हैं. डिप्टी स्पीकर का पद विधानसभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में अहम होता है. जब स्पीकर सदन में मौजूद नहीं होते हैं तो डिप्टी स्पीकर ही चेयर पर होते हैं और कार्यवाही संभालते हैं. इस पद का चुनाव बहुमत के आधार पर होता है. बीजेपी ने चुनाव में 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीटें मिली. बीजेपी राष्ट्रीय राजधानी कि सत्ता में 27 सालों के बाद लौटी है.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।