गुरुवार, सितंबर 10 2026 | 04:19:39 PM

दिल्ली में भी उठी ईद के दौरान खुले में नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़कों पर और मस्जिदों के छत पर नमाद पढ़ने पर बैन लगा दिया है. इस फैसले के बाद देश भर में सियासत तेज हो गई है. इसकी गूंज अब देश की राजधानी दिल्ली में दिखने लगी है. भाजपा विधायक करनैल सिंह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी है. यह चिट्ठी में सड़क पर नमाज के मामले में लिखी गई है. भाजपा विधायक करनैल के सिंह के मुताबिक सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की वजह से यातयात बाधित होता है और आम लोगों से लेकर एंबुलेंस और स्कूल बसे तक प्रभावित होती है. दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लिखी चिट्ठी में करनैल सिंह ने की मांग, प्रशासन मामले पर कदम उठाए और नमाज निर्धारित स्थान और निजी परिसर में ही पढ़ी जाए.

विधायक ने क्या चिट्ठी के अलावा क्या कहा?

शकूरबस्ती से बीजेपी विधायक करनैल सिंह ने इस मुद्दे पर कहा, ‘बिल्कुल एक पत्र लिखा है पुलिस आयुक्त को और आज भी बैठक हुई है. नमाज सड़क पर पढ़ने से आम लोगों को परेशानी होती है. यहां तक कि एम्बुलेंस भी फंस जाती है. ⁠मुझे आश्वासन दिया गया है कि खुले में मीट की दुकानों को बंद किया जाएगा, मंगलवार को मीट की दुकानें नहीं खुलेंगे.’

सड़कों पर नमाज पढ़ने पर क्यों लगाया गया बैन

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सड़कों और मस्जिदों की छतों पर नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध कई कारणों से लगाया गया है. सबसे पहले, सड़कों पर नमाज़ पढ़ने से यातायात बाधित होता है और आम लोगों को असुविधा होती है. इसके अलावा, मस्जिदों की छतों पर नमाज़ पढ़ने से सुरक्षा संबंधी खतरे भी हो सकते हैं. इस प्रतिबंध को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है, उनका कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है. हालांकि, सरकार का कहना है कि यह प्रतिबंध सभी धर्मों के लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए लगाया गया है.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।