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बांग्लादेश में हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़, मां दुर्गा की मूर्ति क्षतिग्रस्त

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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ढाका. बांग्लादेश में एक बार फिर से हिंदुओं और उनकी आस्थाओं पर हमला हो गया है. बांग्लादेश में मां दुर्गा के मंदिर में तोड़फोड़ की गई. भारत ने बांग्लादेश की इस घिनौनी हरकत पर कड़ी आपत्ति जताई है. भारत सरकार ने कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी है कि वे हिंदुओं और उनके धार्मिक संस्थानों की रक्षा करें.

जानें भारत ने क्या कहा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बागंलादेश के साथ भारत सभी मुद्दों पर एक ऐसे माहौल में बात करना चाहता है, जो आपसी लाभकारी संवाद के लिए अनुकूल हो. इसके बाद, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने दुर्गा मंदिर में हुई तोड़फोड़ के लिए बांग्लादेशी अफसरों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार ने मंदिर को सुरक्षा प्रदान करने के बजाय आप इस घटना को अवैध भूमि पर कब्जे का रूप दे रहे हैं. आपने ही मंदिर को तबाह करने दी. हमें बहुत दुख है कि बांग्लादेश में लगातार ऐसी घटनाएं हो रहीं हैं.

मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आते ही हिंदुओं के साथ अन्याय शुरू हुआ

बता दें, पिछले पांच अगस्त को शेख हसीना सरकार का पतन हुआ था, जिसके बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं का रहना दूभर हो गया है. बांग्लादेश में चरमपंथी लगातार हिंदुओं और मंदिरों को निशाना बना रहें हैं. बांग्लादेश में हिंदुओं और उनके धार्मिक आस्थाओं पर ये पहली चोट नहीं है. मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने से बाद से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही है.

बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ ज्यादती

शेख हसीना के इस्तीफा देते ही बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों और उनके व्यापारिक प्रतिष्ठानों को चरमपंथियों ने आग के हवाले पर कर दिया था. चरमपंथी लोगों को जिंदा जला रहे थे. सरकारी नौकरी कर रहे हिंदुओं को जान से मारने की धमकी देकर इस्तीफा लिया गया. सैकड़ों हिंदुओं को सरकारी पदों से इस्तीफा देना पड़ा. सैकड़ों-हजारों हिंदुओं के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को फूंक दिया गया. चरमपंथियों ने यहां तक की देवी-देवताओं को भी नहीं छोड़ा. उन्होंने उनके साथ भी तोड़फोड़ मचाई.

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साभार : न्यूजनेशन

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।