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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बंदूकधारियों ने गोली मार की तीन लोगों की हत्या

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पेशावर. पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। रविवार को आतंकवाद विरोधी अभियानों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे एक समूह पर अज्ञात बंदूकधारियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। इससे एक दिन पहले, खैबर जिले के जखा खेल इलाके में मोर्टार हमले में एक लड़की की मौत हो गई थी, जिसके बाद लोग रविवार को प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान स्थानीय लोगों ने मोमंद गुज सुरक्षा चौकी के सामने लड़की का शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया।

घटना के बाद लोगों ने टैंक-दक्षिण वजीरिस्तान रोड किया जाम

खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के विशेष सहायक सुहैल अफरीदी ने बताया कि तिराह घाटी में प्रदर्शनकारियों पर आतंकवादियों ने गोलीबारी की, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। घटना के बाद, शोकाकुल परिवारों और इलाके के निवासियों ने टैंक-दक्षिण वजीरिस्तान रोड को जाम करके विरोध प्रदर्शन किया और हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों की तुरंत पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

फितना-अल-ख्वारिज के आतंकियों ने चलाईं गोलियां

अफरीदी ने कहा कि शनिवार को लड़की की मौत के बाद, स्थानीय लोगों ने फ्रंटियर कॉर्प्स परिसर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। जब गोलियां चलीं, तब वे गेट के पास जमा थे। उन्होंने बताया कि मैंने जिला अधिकारियों से बात की है। उन्होंने मुझे बताया है कि फितना-अल-ख्वारिज के आतंकवादियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं।

खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने प्रत्येक मृतक के लिए एक करोड़ मुआवजे की घोषणा की

इस बीच, फ्रंटियर कोर खैबर पख्तूनख्वा (उत्तर) के महानिरीक्षक मेजर जनरल राव इमरान सरताज ने फ्रंटियर कोर टीचिंग अस्पताल में घायलों से मुलाकात की। इस दौरान, घायलों ने मेजर जनरल सरताज को हमले की विस्तृत जानकारी दी और प्रदान की जा रही चिकित्सा पर संतोष व्यक्त किया। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मुख्यमंत्री ने तिराह घटना पर गहरा दुख और खेद व्यक्त किया। खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों के लिए 1 करोड़ रुपये और प्रत्येक घायल व्यक्ति के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।