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ज्ञानशेखरन अन्ना यूनिवर्सिटी यौन उत्पीड़न केस में दोषी करार, 2 जून को आएगा फैसला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चेन्नई. शहर की महिला अदालत ने बुधवार को अन्ना यूनिवर्सिटी यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी ज्ञानशेखरन को दोषी करार दे दिया है. महिला अदालत की जज राजलक्ष्मी 2 जून को फैसला सुनाएंगी. यह मामला पिछले साल दिसंबर का है. यूनिवर्सिटी की एक 19 वर्षीय छात्रा का दुष्कर्म हुआ था. पुलिस ने मामले की जांच करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया था. इसकी पहचान ज्ञानशेखरन के रूप में हुई थी. अब कोर्ट ने उसे दोषी करार दे दिया है.

दरअसल 37 वर्षीय ज्ञानशेखरन अन्ना यूनिवर्सिटी में बिरयानी बेचने का काम करता था. 23 दिसंबर 2024 को दूसरे वर्ष की छात्रा अपने मित्र से मुलाकात करने के लिए गई थी. यहां ज्ञानशेखरन भी आ जाता है और छात्रा के मित्र के साथ मारपीट करता है. इसके बाद छात्रा के साथ दुष्कर्म किया. घटना के बाद कोट्टूरपुरम थाने में शिकायत दर्ज की गई और दोनों को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

अदालत 2 जून को सुनाएगी फैसला

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस एक्टिव हो गई. उसने आरोपी ज्ञानशेखरन को गिरफ्तार कर दिया. वह बिरयानी बेचने का काम करता था. अब अदालत ने ज्ञानशेखरन को दोषी करार दे दिया है और 2 जून को फैसला भी सुनाया जाएगा. इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा रही. इसके साथ ही यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था.

अन्ना यूनिवर्सिटी की घटना के बाद पुलिस प्रशासन पर उठा था सवाल

शहर के बीचों-बीच हुई इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया. विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ द्रमुक के सहयोगियों ने भी घटना की तीखी आलोचना की थी. इस घटना के बाद ग्रेटर चेन्नई पुलिस को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. अधिकारियों ने पहले क्रिसमस समारोह के लिए अचूक सुरक्षा-व्यवस्था लागू करने का दावा किया था और आठ हजार से अधिक अधिकारियों को ड्यूटी पर तैनात किया था.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।