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इजरायल ने हवाई हमले में हमास प्रमुख मोहम्मद सिनवार को किया ढेर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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गाजा. इजरायल ने हमास के कमांडर और याह्या सिनवार के भाई मोहम्मद सिनवार के मारे जाने पर अपनी मुहर लगा दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आज इसकी पुष्टि की। संसद में बोलते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि 13 मई को इस्राइली सेना के हवाई हमले में हमास कमांडर मोहम्मद सिनवार मार दिया गया था। संसद में बोलते हुए नेतन्याहू ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में इजरायल द्वारा मारे गए हमास नेताओं की सूची में सिनवार को भी शामिल किया। बता दें कि इससे पहले, इस्राइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा था कि जैसे संकेत मिल रहे हैं, उनसे लगता है कि मोहम्मद सिनवार व जकारिया सिनवार मारे जा चुके हैं।

18 मई को किया गया था ये दावा

इससे पहले 18 मई को कई मीडिया रिपोर्ट्स में सिनवार की मौत का दावा किया गया था। इनमें कहा गया था कि इस्राइली सेना की तरफ से किए गए यूरोपियन अस्पताल पर ताबड़तोड़ हवाई हमलों में हमास का स्वयंभू कमांडर मोहम्मद सिनवार मारा गया था। साथ ही इनमें यह भी कहा गया था कि उसका शव 10 अन्य सहयोगियों के साथ खान यूनिस की एक सुरंग से बरामद किया गया था। उसके अलावा, हमले में हमास की राफा ब्रिगेड के कमांडर मोहम्मद शबाना के भी मारे जाने की बात कही गई थी। मोहम्मद हमास नेता याह्या सिनवार का भाई था, जिसे इस्राइली सेना ने पिछले साल अक्तूबर में मार दिया था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अस्पताल के नीचे सुरंग बनी हुई थी, जिसका कमांडर कंपाउंड के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था और वहीं पर मोहम्मद सिनवार रह रहा था।

कौन था मोहम्मद सिनवार?

मोहम्मद सिनवार हमास का गाजा चीफ और हमास के शीर्ष नेता याह्या सिनवार का भाई था। याह्या को इस्राइली सेना ने पिछले साल अक्तूबर में मार दिया था। इजरायल में 7 अक्तूबर को हुए हमास के हमले का मास्टरमाइंड भी याह्या सिनवार को माना जाता है। इजरायल में 7 अक्तूबर 2023 के घातक हमले में करीब 1200 लोगों की मौत हुई थी और करीब 250 लोग बंधक बना लिए गए थे। याह्या सिनवार को गाजा का सबसे ताकतवर नेता माना जाता था। वह इजरायल की कैद में भी रहा था और करीब 24 साल जेल में बिता चुका था। इस्राइली सैनिक गिलाद शालित के बदले में इजरायल की जेल से 1027 फलस्तीनी कैदी रिहा किए गए थे, उन्हीं कैदियों में याह्या सिनवार भी शामिल था। सिनवार ईरान का करीबी था और हमास के कट्टरपंथी समूह का नेतृत्व करता था।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।