लोड हो रहा है...

बिना शर्त समाप्त हुआ थाईलैंड और कंबोडिया के बीच युद्ध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

बैंकाक. थाईलैंड और कंबोडिया के शीर्ष नेता सीमा पर संघर्ष को समाप्त करने के लिए तत्काल और बिना शर्त युद्ध विराम पर सहमत हो गए हैं. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने अब से थोड़ी देर पहले ये जानकारी मीडिया से साझा की है. दोनों दक्षिण-पूर्वी एशियाई पड़ोसियों के बीच मलेशिया में हुई वार्ता के बाद यह जानकारी दी गई. डोनाल्ड ट्रंप के दखल के बाद थाईलैंड और कंबोडिया दोनों फौरन सीजफायर यानी युद्धविराम को लेकर होने वाली बातचीत पर सहमत हो गए.

कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट ने 27 जुलाई, 2025 को कहा कि उनका देश तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम पर सहमत हो गया है. इस सीजफायर को लागू कराने में सबसे अहम भूमिका रही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिनके कड़े निर्देशों के फौरन बाद दोनों देश वार्ता की टेबल पर आने पर राजी हो गए थे. मलेशिया बीते 72 घंटों से सीजफायर के लिए दोनों को मनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन थाई और कंबोडियाई दोनों नेता जंग पर अड़े थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि कंबोडिया और थाईलैंड के नेता युद्धविराम पर जल्द से जल्द बातचीत करने के लिए तुरंत मिलने पर सहमत हुए हैं, गुड न्यूज़ आने वाली है’.

इस ट्रंप कार्ड के आगे झुक गए दोनों

थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने ट्रंप का आभार व्यक्त किया और कहा कि थाईलैंड युद्धविराम के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत है. लेकिन हम कंबोडियाई पक्ष की ओर से ईमानदार प्रयास चाहते हैं. फुमथम, स्कॉटलैंड की यात्रा के दौरान ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्टों पर फेसबुक पोस्ट के ज़रिए प्रतिक्रिया दे रहे थे. इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट और फुमथम से बात करते चेतावनी दी थी कि अगर सीमा पर संघर्ष जारी रहा तो वो किसी के साथ भी व्यापारिक समझौते नहीं करेंगे.

साभार : जी न्यूज

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।