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रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने दिल्ली में पूर्व सैनिकों के लिए आयोजित रोजगार मेले का उद्घाटन किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने पूर्व सैनिकों (ईएसएम) के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और उन्हें विकसित भारत का ब्रांड एंबेसडर करार दिया। वे 29 अगस्त, 2025 को पूर्व सैनिकों के लिए आयोजित रोजगार मेले के उद्घाटन समारोह संबोधित कर रहे थे। इस मेले का आयोजन दिल्ली के शंकर विहार सैन्य केंद्र में रक्षा मंत्रालय के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के पुनर्वास महानिदेशालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक और कॉर्पोरेट कंपनियों के सदस्य उपस्थित थे। रक्षा राज्य मंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा है कि पूर्व सैनिकों द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान दिखाया गया समर्पण और साहस अब इन कम्पनियों के विकास में भी सहायक सिद्ध होगा।

इस आयोजन में भाग लेने वाली 40 कंपनियों द्वारा प्रस्तुत नौकरी के अवसरों का लाभ उठाने के लिए 1500 से अधिक पूर्व-सेवानिवृत्त सैनिकों ने अपना पंजीकरण कराया। इस मेले में 750 से अधिक नौकरियों के अवसर उपलब्ध कराए गए थे। चयनित पूर्व सैनिकों की साक्षात्कार/स्क्रीनिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी और फिर उन्हें पर्यवेक्षी, तकनीकी सहायक और कनिष्ठ से लेकर वरिष्ठ प्रबंधन तथा प्रशासनिक व्यवस्था तक विभिन्न भूमिकाओं में नियुक्त किया जाएगा।

यह इस वर्ष देश भर में आयोजित होने वाले अठारह रोजगार मेलों में से चौथा है। यह आयोजन कॉर्पोरेट और पूर्व-सैनिकों, दोनों के लिए ही लाभदायक रहा है। एक तरफ जहां पूर्व-सैनिकों को अपनी सेवा के दौरान अर्जित तकनीकी एवं प्रशासनिक कौशल को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्राप्त हुआ है, वहीं दूसरी ओर कॉरपोरेट्स कंपनियों को अनुभवी, अनुशासित तथा कुशल पूर्व-सैनिकों की स्क्रीनिंग से लाभ मिला है। इस रोजगार मेले में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट संस्थाओं ने हिस्सा लिया।

भूतपूर्व सैनिक कल्याण सचिव डॉ. नितेन चंद्रा, दिल्ली क्षेत्र के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार और महानिदेशक (पुनर्वास) मेजर जनरल एसबीके सिंह ने भी पूर्व-सैनिकों और कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। एसआईडीएम के महानिदेशक श्री रमेश के. इस आयोजन के कॉर्पोरेट सम्मानित अतिथि थे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।